भारत से सटे सीमावर्ती सीटों पर बीएनपी की जीत ने बढ़ाई चिंता, पश्चिम बंगाल में बढ़ सकता है तनाव

West Bengal : भारत-बांग्लादेश सीमा से लगी सीटें कट्टरपंथी राजनीतिक दलों के हाथ में जाने से एक बार फिर अशांति फैलने का खतरा मंडरा रहा है. देश की आरएडब्ल्यू, आईबी या अन्य खुफिया एजेंसियों को अब इन सीमावर्ती क्षेत्रों के बारे में नए सिरे से सोचना होगा.

West Bengal: कोलकाता. बांग्लादेश में हुए आम चुनाव में भारत से सटे सीमावर्ती सीटों पर बीएनपी की जोरदार जीत ने भारत की चिंता बढ़ा दी है. पश्चिम बंगाल के करीब तीन जिलों में तनाव बढ़ने की आशंका जतायी जाने लगी है. मालदा – मुर्शिदाबाद  और कूच बिहार जैसे जिलों में खास तौर सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क किया जा रहा है. सीमा पार आईएसआई सक्रिय है. वहां नए आतंकवादी ठिकाने बन सकते हैं. सीमा पार की संसदीय सीटों पर जमात के उम्मीदवारों के जीतने के बाद, देश की खुफिया एजेंसियां ​​कथित तौर पर अपनी सतर्कता और निगरानी बढ़ा रही हैं.

सीमा से सटी 78 प्रतिशत सीटें जमात के खाते में 

बांग्लादेश के 13वें चुनाव में बीएनपी को शानदार जीत मिली है. बीएनपी ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर बहुमत हासिल कर लिया है. बांग्लादेश चुनावों के नतीजों से पता चलता है कि सीमावर्ती संसदों में से 78 प्रतिशत सीटें जमात के खाते में गई हैं. सतखिरा, चापाइ, नवाबगंज, कुरीग्राम, रंगपुर और राजशाही जैसे क्षेत्रों में जमात ने पूर्ण वर्चस्व स्थापित कर लिया है. इन सीटों पर जीत हासिल करने के बाद जमात ने भारतीय खुफिया एजेंसियों और बीएसएफ की चिंताएं बढ़ा दी हैं.

सीमा पर बढ़ी चिंता

उत्तर-पूर्वी भारत के अधिकतर सीमावर्ती क्षेत्रों में बांग्लादेश की ओर स्थित संसदों में बीएनपी को जीत मिली है, लेकिन इस मामले में पश्चिम बंगाल और असम की सीमा विशेष चिंता का विषय है, क्योंकि इन दो राज्यों में हाल में ही विधानसभा के चुनाव होने हैं. मालदा, मुर्शिदाबाद, कूच बिहार, जलपाईगुड़ी और धुबरी सीमा के पार जमात ने भारी बहुमत से जीत हासिल की है. असम से सटे इलाके जमात के कब्जे में आ गए हैं. 

भारत विरोधी संगठन होंगे सक्रिय

सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञ राहुल कुमार का कहना है कि यूनुस के शासनकाल में भी ये सीमावर्ती गांव भारत विरोधी गतिविधियों और पाकिस्तान की जासूसी एजेंसी, आईएसआई के अभियानों के प्रमुख केंद्रों रहा, लेकिन नयी सरकार में यह भारत के लिए खतरे पैदा कर सकते हैं. हालांकि बीएनपी को अकेले बहुमत नहीं मिली है, लेकिन उसके साथ खुफिया एजेंसियों को पूरा भरोसा है. 

बढ़ानी होगी निगरानी

पत्रकार धृतिमान बनर्जी कहते हैं कि बांग्लादेश में लंबे समय से निर्वाचित सरकार नहीं थी. वहां की सरकार ने भी सीमावर्ती गांवों में भारत विरोधी गतिविधियों को ज्यादा महत्व नहीं दिया है. अब जमात जैसे भारत विरोधी पार्टी का सत्ता में आना इन गांवों में भारत विरोधी गतिविधियों को तेज कर सकते हैं. वैसे हमारी सैन्य खुफिया एजेंसियां ​​पहले से ही इन गांवों पर नजर रख रही हैं.

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By Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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