सफेद झूठ बोल रहा निर्वाचन आयोग! वोटर लिस्ट विवाद पर मो सलीम की चिट्ठी से मचा हड़कंप

Bengal Voter List SIR Controversy: बंगाल में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर माकपा ने चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. मोहम्मद सलीम ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर आयोग के ‘सर्वसम्मति’ वाले दावे को झूठा बताया है. कहा है कि ‘तार्किक विसंगतियों’ के नाम पर 60 लाख मतदाताओं को परेशान किया जा रहा है. आयोग का रवैया पक्षपातपूर्ण है. पढ़ें पूरी रिपोर्ट.

Bengal Voter List SIR Controversy: पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर चल रहा विवाद नये स्तर पर पहुंच गया है. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की पश्चिम बंगाल राज्य समिति ने चुनाव आयोग (ECI) द्वारा 9 मार्च को जारी उस बयान पर औपचारिक विरोध दर्ज कराया है, जिसमें दावा किया गया था कि अधिकांश राजनीतिक दलों ने SIR प्रक्रिया की सराहना की है. माकपा राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने मुख्य चुनाव आयुक्त को कड़ी चिट्ठी लिखी है, जिसमें इस दावे को ‘सफेद झूठ’ और तथ्यों से परे करार दिया है.

आम सहमति का दावा भ्रामक

मोहम्मद सलीम ने कहा कि यह कहना पूरी तरह गलत है कि राजनीतिक दलों ने इस प्रक्रिया पर भरोसा जताया है. उन्होंने सवाल उठाया कि आयोग उन दलों के नाम सार्वजनिक क्यों नहीं कर रहा, जिन्होंने सराहना की और जिन्होंने विरोध किया?

60 लाख वोटरों में खौफ

माकपा के राज्य सचिव मो सलीम ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि तार्किक विसंगतियों (Logical Discrepancies) के नाम पर पश्चिम बंगाल के 60 लाख से अधिक मतदाताओं को मानसिक तनाव और अनिश्चितता में धकेल दिया गया है. यह उनके मौलिक मतदान अधिकार पर सीधा हमला है.

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आयोग की प्रशासनिक विफलता

माकपा का कहना है कि SIR दस्तावेजों के सत्यापन में न्यायपालिका का हस्तक्षेप आयोग की प्रशासनिक निष्क्रियता का परिणाम है. पत्र में बंगाल सरकार के उन अधिकारियों को भी आड़े हाथों लिया गया, जो सत्तारूढ़ टीएमसी के ‘अनुचर’ की तरह काम कर रहे हैं.

RSS-BJP के एजेंडे का आरोप

पार्टी ने आगाह किया है कि चुनावी रोल को RSS-BJP के वैचारिक एजेंडे के अनुसार ढालने का कोई भी प्रयास आयोग के संवैधानिक जनादेश का उल्लंघन होगा. माकपा ने मांग की कि किसी भी पात्र मतदाता को उसके धर्म, राजनीति या आर्थिक स्थिति के आधार पर लिस्ट से बाहर न किया जाए.

संस्थागत अखंडता पर खतरा

सलीम ने लिखा कि भ्रामक दावे करके आयोग न केवल अपनी संस्थागत गरिमा खो रहा है, बल्कि भारत के संविधान की पवित्रता को भी कमजोर कर रहा है.

क्या है माकपा की मांग?

पार्टी ने आयोग से अपने रुख को सुधारने और मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया को पारदर्शी, निष्पक्ष और समावेशी बनाने का आग्रह किया है. माकपा ने जनता से भी अपील की है कि वे अपने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए सतर्क रहें.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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