बंगाल चुनाव: मुर्शिदाबाद ने कांग्रेस और वामपंथ की बचाई लाज, हुमायूं-नौशाद की भी बच गयी साख

Bengal Election Result: भाजपा और तृणमूल को छोड़कर अन्य पार्टियों ने 6 सीटें जीतीं. पिछले चुनावों में भाजपा और तृणमूल के अलावा केवल नौशाद ने ही जीत हासिल की थी.

Bengal Election Result: कोलकाता: आजादी के बाद दशकों तक बंगाल की सत्ता में रही कांग्रेस और वामपंथी पार्टियां पिछले पांच वर्षों ‘शून्य’ का दर्द सहन कर रही थी. किसी भी बहस में विपक्षी दल का कोई न कोई व्यंग्य जरूर उनपर हो जाता था. वामपंथियों ने 26वें चुनाव में वही शून्य हासिल किया. कांग्रेस को भी 21वें चुनाव में शून्य सीटें मिली थीं. इस बार दोनों की पार्टियों को सीटें मिली हैं. हुमायूं कबीर ने एक नई पार्टी बनाकर सीटें पा ली है. आईएसएफ के नौशाद सिद्दीकी ने भानगढ़ से अपनी सीट बरकरार रखी है. कुल मिलाकर तृणमूल और भाजपा के अलावा इस विधानसभा चुनाव में इन पार्टियों ने भी जीत का स्वाद चखा है.

मुर्शिदाबाद में कांग्रेस का झंडा लहराया

कांग्रेस ने इस बार विधानसभा चुनाव अपने बूते लड़ने का फैसला किया. सबकी निगाहें इस बात पर टिकी थीं कि मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर दिनाजपुर में कांग्रेस का प्रदर्शन कैसा रहेगा. लेकिन, मालदा में कांग्रेस कोई खास छाप नहीं छोड़ पाई. मुर्शिदाबाद में उन्होंने किसी तरह अपनी साख बचाई. कांग्रेस ने दो सीटें जीतीं. दोनों मुर्शिदाबाद जिले में थीं, फरक्का और रानीनगर. फरक्का से मोतब शेख ने कांग्रेस के टिकट पर जीत हासिल की और रानीनगर से जुल्फिकार अली ने.

हुमायूं का ‘दोहरा’ धमाका

चुनाव से कुछ महीने पहले, हुमायूं कबीर ने तृणमूल पार्टी छोड़ दी और एक नई राजनीतिक पार्टी बनाई. उन्होंने खुद दो सीटों से चुनाव लड़ा. उनकी पार्टी, आम जनता उन्नयन पार्टी ने राज्य भर में 150 से अधिक सीटों पर उम्मीदवार उतारे. बाकी उम्मीदवार जीत नहीं पाए. हालांकि, हुमायूं ने दोहरी जीत दर्ज की. वे दो सीटों से चुनाव लड़ रहे थे और दोनों में जीत हासिल की. ​​ये सीटें थीं रेजिनगर और नवादा.

वामपंथियों का सूखा समाप्त

पिछले चुनावों में बंगाल में वामपंथी दल अपना खाता भी नहीं खोल पाए. इस बार ऐसी अटकलें थीं कि वामपंथी दल कुछ सीटों पर अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं. बेशक, ऐसा नहीं हुआ. हालांकि, मुर्शिदाबाद में उन्होंने अपनी साख बचा ली. डोमकल से सीपीएम उम्मीदवार मोहम्मद मुस्तफिजुर रहमान ने जीत हासिल की.

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भानगढ़ में फिर से ‘भाईजान’

अब्बास सिद्दीकी ने इक्कीस के चुनावों में एक नई पार्टी बनाई थी. नौशाद सिद्दीकी ने आईएसएफ के टिकट पर भानगढ़ से जीत हासिल की थी. इस बार भी वे भानगढ़ से ही चुनाव लड़ रहे हैं. तृणमूल ने उनके खिलाफ शौकत मोल्लाह को उम्मीदवार बनाया है. ‘भाईजान’ नौशाद ने आखिरकार बाजी मार ली. उन्होंने भानगढ़ से एक बार फिर जीत हासिल कर ली है.

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लेखक के बारे में

By Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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