बंगाल चुनाव 2026: कालियागंज के भाजपा उम्मीदवार उत्पल महाराज पर भारत सेवाश्रम संघ की बड़ी कार्रवाई

Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले भारत सेवाश्रम संघ (BSS) ने भाजपा उम्मीदवार स्वामी ज्योतिर्मयानंद (उत्पल महाराज) को संगठन से निष्कासित कर दिया है. दूसरी ओर, महाराज का दावा है कि उन्होंने पहले ही इस्तीफा दे दिया था. भाजपा ने महाराज को कालियागंज सीट से टिकट दिया है.

Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 लड़ रहे कालियागंज के भाजपा उम्मीदवार उत्पल महाराज पर गाज गिरी है. प्रसिद्ध सामाजिक-धार्मिक संस्था भारत सेवाश्रम संघ (BSS) ने अपने प्रमुख भिक्षु स्वामी ज्योतिर्मयानंद, जिन्हें उत्पल महाराज के नाम से भी जाना जाता है, को संगठन से निष्कासित कर दिया है. यह कड़ी कार्रवाई स्वामी ज्योतिर्मयानंद द्वारा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के टिकट पर चुनावी मैदान में उतरने के फैसले के बाद की गयी है. संघ ने स्पष्ट किया है कि दलीय राजनीति में सक्रिय भागीदारी उनके मूल सिद्धांतों और आध्यात्मिक अनुशासन के खिलाफ है.

राजनीति का जाल और अनुशासन का उल्लंघन – संघ

भारत सेवाश्रम संघ की शीर्ष निर्णय लेने वाली समिति ने एक आपातकालीन बैठक के बाद स्वामी ज्योतिर्मयानंद के निष्कासन की पुष्टि की. संघ द्वारा जारी आंतरिक मेमो में कहा गया है कि एक भिक्षु से जिस त्याग और वैराग्य की अपेक्षा की जाती है, सक्रिय राजनीति में उतरना उस मार्ग से पूरी तरह अलग रास्ते पर चलना है. संघ के अधिकारियों के अनुसार, यह कदम संगठन की छवि और इसकी गैर-राजनीतिक प्रकृति को बनाये रखने के लिए जरूरी था. संघ ने कड़े शब्दों में इसे ‘राजनीति के जाल’ में फंसना करार दिया है.

उत्तर दिनाजपुर की कालियागंज सीट से उम्मीदवार हैं उत्पल महाराज

भाजपा ने स्वामी ज्योतिर्मयानंद को उत्तर दिनाजपुर जिले की महत्वपूर्ण कालियागंज विधानसभा सीट से अपना उम्मीदवार घोषित किया है. महाराज की इस क्षेत्र में अच्छी पकड़ मानी जाती है. इसे देखते हुए भाजपा ने उन्हें चुनावी जंग में उतारा है. हालांकि, संघ का मानना है कि किसी भी भिक्षु या ब्रह्मचारी को किसी विशिष्ट राजनीतिक दल का झंडा नहीं उठाना चाहिए, क्योंकि इससे संस्था की तटस्थता प्रभावित होती है.

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स्वामी ज्योतिर्मयानंद बोले- मैंने पहले ही दे दिया था इस्तीफा

निष्कासन की खबरों के बीच स्वामी ज्योतिर्मयानंद उर्फ उत्पल महाराज ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उन्होंने भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने की सहमति देने से पहले ही संघ के मुख्यालय में अपना त्यागपत्र सौंप दिया था. उन्होंने समाज के पुनर्निर्माण और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने के लिए राजनीति को एक माध्यम बताया.

मुझे संघ के नियमों की पूरी जानकारी है. एक भिक्षु सक्रिय राजनीति का हिस्सा नहीं बन सकता. इसीलिए मैंने स्वेच्छा से अलग होने का निर्णय लिया था. संघ ने केवल मेरे इस्तीफे पर मुहर लगायी है.

स्वामी ज्योतिर्मयानंद उर्फ उत्पल महाराज, भारत सेवाश्रम संघ

भारत सेवाश्रम संघ की विचारधारा और राजनीतिक तटस्थता

भारत सेवाश्रम संघ की स्थापना एक परोपकारी और आध्यात्मिक संस्था के रूप में हुई थी. 100 से अधिक वर्षों से यह संगठन आपदा राहत, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में नि:स्वार्थ सेवा के लिए जाना जाता है. संघ का कहना है कि ‘सांसारिक मामलों से विरक्ति’ उनकी विचारधारा का आधार है. हाल के वर्षों में बंगाल की राजनीति में धार्मिक संस्थाओं की भूमिका पर कई बार विवाद हुए हैं, लेकिन बीएसएस ने इस कार्रवाई के जरिये यह संदेश देने की कोशिश की है कि वे अपनी गैर-राजनीतिक पहचान से समझौता नहीं करेंगे. संघ का मुख्यालय कोलकाता में है.

चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है असर

बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में हिंदुत्व और आध्यात्मिक पहचान एक बड़ा मुद्दा बनकर उभर रहे हैं. ऐसे में एक सम्मानित भिक्षु का भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ना और फिर संघ द्वारा उन पर कार्रवाई करना, चुनावी विमर्श को नयी दिशा दे सकता है. कालियागंज सीट पर अब मुकाबला और भी दिलचस्प होने की उम्मीद है, जहां महाराज अपनी आध्यात्मिक छवि और भाजपा के कैडर के भरोसे मैदान में हैं.

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By Mithilesh Jha

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