बेटी की जान बचाने के लिए ‘ममता’ बनी एक मां

21 जुलाई को शहीद दिवस के अवसर पर विक्टोरिया हाउस के सामने आयोजित तृणमूल कांग्रेस की सभा में लाखों कार्यकर्ता और समर्थक राज्य के विभिन्न हिस्सों से धर्मतला में एकत्रित हुए थे.

संवाददाता, कोलकाता

21 जुलाई को शहीद दिवस के अवसर पर विक्टोरिया हाउस के सामने आयोजित तृणमूल कांग्रेस की सभा में लाखों कार्यकर्ता और समर्थक राज्य के विभिन्न हिस्सों से धर्मतला में एकत्रित हुए थे. इस भीड़ में कई लोग अलग-अलग वेशभूषा में आये थे, लेकिन एक महिला ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा. नीले बॉर्डर वाली सफेद साड़ी, हवाई चप्पल और काले फ्रेम का चश्मा पहने उस महिला को देखकर तृणमूल समर्थक और कार्यकर्ता हैरान रह गये, क्योंकि वह हूबहू मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जैसी दिख रही थीं. जब उन्हें एहसास हुआ कि यह असली मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि एक अन्य महिला है जो प्रतीकात्मक रूप से ममता बनर्जी के पोशाक में आयी है, तो वे और भी चकित हुए. इस महिला के हाथों में ‘जीवन भंडार’ लिखा हुआ एक मिट्टी का गुल्लक था और उनकी इस वेशभूषा के पीछे एक नेक मकसद छिपा था.

इस महिला का नाम हेमंती दास है, जो दक्षिण 24 परगना के सोनारपुर की रूप नगर की निवासी हैं. हेमंती ने बताया कि उनकी इकलौती बेटी हृदिका एक जटिल न्यूरोलॉजिकल बीमारी ‘स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी, टाइप-1’ से पीड़ित है. इस बीमारी के इलाज के लिए एक बेहद कीमती इंजेक्शन की ज़रूरत है, जिसकी कीमत करोड़ों रुपये में है. हेमंती, जो पेशे से गृहिणी हैं और उनके पति नरेंद्रपुर रामकृष्ण मिशन स्कूल में भूगोल के शिक्षक हैं, अपनी बेटी के इलाज के लिए पैसे जुटाने के उद्देश्य से 21 जुलाई की सभा में पहुंची थी.

हेमंती ने कहा, “ हमारी दीदी ममता बनर्जी हमेशा अपने राज्य के लोगों का भला सोचती हैं. वह समाज को फायदा पहुंचाने वाली जनहित योजनाएं लोगों के लिए लाती हैं.” उन्होंने मुख्यमंत्री की इसी खासियत से प्रेरित होकर अपने गुल्लक का नाम ‘जीवन भंडार’ रखा है. हेमंती ने भावुक होते हुए कहा,“ मैं आज दीदी के भरोसे यहां आयी हूं. मेरा विश्वास है कि मेरी मदद कर एक बच्ची को बचाने को लेकर दीदी के प्रति मेरा विश्वास आज तृणमूल कार्यकर्ता एवं समर्थक अवश्य सफल करेंगे. यदि भीड़ में हर व्यक्ति 2-5 रुपये भी दे देगा तो बड़ी मेहरबानी होगी.”

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Published by: Akhilesh kumar singh

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