नये साल में हालात और बिगड़ने के आसार: सलीम

गुजरा साल राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक लिहाज से काफी भारी रहा. इसी साल भाजपा को भारी जनादेश इस देश की जनता ने दिया तो दूसरे पल यही जनता भाजपा के खिलाफ हो गयी. नाराज लोग भाजपा के खिलाफ अपने गुस्से का इजहार करने के लिए बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरे. पांच हजार अरब डॉलर […]

गुजरा साल राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक लिहाज से काफी भारी रहा. इसी साल भाजपा को भारी जनादेश इस देश की जनता ने दिया तो दूसरे पल यही जनता भाजपा के खिलाफ हो गयी. नाराज लोग भाजपा के खिलाफ अपने गुस्से का इजहार करने के लिए बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरे. पांच हजार अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था वाला देश बनाने का वादा करनेवाले मोदी के राज में अर्थव्यवस्था पटरी से उतरती नजर आ रही है.

जीडीपी के क्षेत्र में हम बांग्लादेश से भी पिछड़ रहे हैं. नौजवानों को लोग यह मानने लगे थे कि यह पीढ़ी अब राजनीति और आंदोलन से दूर हो गयी है. अब देश का नवनिर्माण हो रहा है. नौजवान जिस तरह से धार्मिक उन्माद और आपस में लोगों को बांटने की नीति के खिलाफ सड़कों पर उतर रहे हैं, उससे एक उम्मीद की किरण नजर आ रही है.

साल 2019 आर्थिक, राजनीतिक व सांस्कृतिक मोरचे पर काफी उथल-पुथल वाला रहा है. साल 2020 भी इससे अछूता नहीं रहेगा. जनता लगातार संकेत दे रही है. अगर देश को गलत राह पर ले जाने का प्रयास हुआ तो जनता उसे नहीं मानेगी और सरकार को बाध्य कर देगी कि वह लोगों को गुमराह करने की नीति को बदलने पर मजबूर कर देगी.

पूर्व सांसद व माकपा पोलित ब्यूरो के सदस्य मोहम्मद सलीम के साथ नवीन कुमार राय से बातचीत पर आधारित

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