भाजपा में नयी ज्वाइनिंग में अब पुराने नेता नहीं होंगे दरकिनार

कोलकाता : लोकसभा चुनाव में सफलता के बाद भाजपा में अन्य राजनीतिक दल के नेताओं की ज्वाइनिंग और फिर से भाजपा छोड़ कर पुरानी पार्टी में लौटने के बढ़ते मामले और नये नेताओं की ज्वाइंनिंग से पुराने नेताओं में पनपते असंतोष के बाद प्रदेश भाजपा ने ज्वाइनिंग को लेकर अपना रूख बदल लिया है. राष्ट्रीय […]

कोलकाता : लोकसभा चुनाव में सफलता के बाद भाजपा में अन्य राजनीतिक दल के नेताओं की ज्वाइनिंग और फिर से भाजपा छोड़ कर पुरानी पार्टी में लौटने के बढ़ते मामले और नये नेताओं की ज्वाइंनिंग से पुराने नेताओं में पनपते असंतोष के बाद प्रदेश भाजपा ने ज्वाइनिंग को लेकर अपना रूख बदल लिया है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भी बिना किसी जांच परख के पार्टी में ज्वाइनिंग पर आपत्ति जतायी थी. आरएसएस की आपत्ति के बाद प्रदेश भाजपा ने नयी ज्वाइनिंग को लेकर अपना रूख कड़ा कर लिया है.

पार्टी की ओर से निर्देश जारी किया गया है कि अब कोई भी ज्वाइनिंग पुराने नेताओं को दरकिनार या उनकी सहमति के बिना नहीं होगी. प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ नेता का कहना है कि पार्टी के पुराने नेताओं में इसे लेकर असंतोष पैदा हो रहा था. ऐसा देखा जा रहा था कि अन्य पार्टी के नेता दिल्ली या कोलकाता आकर भाजपा में ज्वाइन कर ले रहे थे और जब वे अपने इलाके में लौट कर जाते हैं, इनकी जानकारी उस इलाके के पुराने नेताओं को नहीं रहती है.
और जब वे लौटकर अपने इलाके में जाते हैं, तो भाजपा के पुराने कार्यकर्ता अपने को दरकिनार समझने लगते हैं. इससे पार्टी को नुकसान पहुंच रहा है. भाजपा के वरिष्ठ नेता का कहना है कि जब यदि ब्लॉक स्तर पर कोई ज्वाइनिंग होती है, तो ब्लॉक स्तर के भाजपा नेता, जिला स्तर पर जिला स्तर के भाजपा के पुराने नेता और राज्य स्तर पर राज्य स्तर के नेताओं से चर्चा करनी होगी. प्रदेश भाजपा मुख्यालय में पूरी सूची रहेगी कि कौन नेता कब और कहां ज्वाइन कर रहा है तथा उसका पुराना रिकार्ड क्या है तथा भाजपा से उसकी क्या अपेक्षाएं हैं.
वरिष्ठ नेता का कहना है कि सत्तारूढ़ तृणमूल से टूटकर कई बड़े नेताओं ने राज्य और जिला स्तर के भाजपा नेतृत्व को दरकिनार कर दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया था. इससे उनके संबंधित क्षेत्रों में पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय बनाने में मुश्किल हो रही है. साथ ही पार्टी के अंदर अवहेलना को लेकर रोष भी पनप रहा है. इसे देखते हुए यह निर्णय किया गया है कि पार्टी में शामिल होनेवाले नेताओं का ट्रैक रिकॉर्ड देखना होगा. उसे स्क्रीनिंग कमेटी की सहमति की प्रक्रिया से गुजरना होगा. उसके बाद राज्य में उन नेताओं को पार्टी की सदस्यता दी जायेगी. इससे राज्य की राजनीति में बड़ा प्रभाव पड़ेगा और जिला स्तर के नेताओं के साथ समन्वय बनाने में भी मदद मिलेगी.

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