रोजाना 55 करोड़ का कारोबार होता है महानगर कोलकाता के फुटपाथों पर

आनंद कुमार सिंह कोलकाता : अपने कारोबार को जमाने के लिए कारोबारियों की मेहनत किसी से छिपी नहीं है. अपने व्यवसाय को जमाने के लिए उन्हें वर्षों जुटे रहना पड़ता है. लेकिन लोगों के चलने के लिए बने फुटपाथ पर दुकान लगानेवालों की स्थिति कई मायनों में आम कारोबारियों से बेहतर कही जा सकती है. […]

आनंद कुमार सिंह

कोलकाता : अपने कारोबार को जमाने के लिए कारोबारियों की मेहनत किसी से छिपी नहीं है. अपने व्यवसाय को जमाने के लिए उन्हें वर्षों जुटे रहना पड़ता है. लेकिन लोगों के चलने के लिए बने फुटपाथ पर दुकान लगानेवालों की स्थिति कई मायनों में आम कारोबारियों से बेहतर कही जा सकती है. केवल वृहत्तर कोलकाता में फुटपाथ पर अपनी दुकान सजाने वाले हॉकरों की कुल दैनिक कमाई 55 करोड़ रुपये है.

यानी महीने में 1650 करोड़ और सालाना करीब 20 हजार करोड़ रुपये की कमाई. देशभर में हॉकरों के अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज बुलंद करनेवाले हॉकर संग्राम कमेटी के महासचिव शक्तिमान घोष कहते हैं कि यह आंकड़ा वर्तमान में और अधिक ही होगा. वह बताते हैं कि केवल वृहत्तर कोलकाता में हॉकरों की संख्या 2.75 लाख से अधिक है. बंगाल में हॉकरों की तादाद 16 लाख से अधिक है. देशभर में हॉकरों की संख्या करीब चार करोड़ है. इन हॉकरों की औसत दैनिक कमाई करीब दो हजार रुपये है.

श्री घोष यह स्पष्ट करते हैं कि अब हॉकरों पर फुटपाथ दखल करने का आरोप नहीं लगाया जा सकता. 2014 में संसद ने हॉकरों के लिए कानून पास कर दिया. देश के अन्य राज्यों में इसे लागू कर दिया गया है लेकिन बंगाल में यह अब तक नहीं हो सका है. इस कानून के मुताबिक हॉकरों का सर्वे करके उनका पंजीकरण किया जाना था. हॉकरों के पंजीकरण और फिर उनके वोट के बाद टाउन वेंडर कमेटी का गठन होता. यही कमेटी तय करती है कि किस स्थान पर हॉकर फुटपाथ की कितनी जगह घेरेंगे. लेकिन यह सर्वे अब तक नहीं हो सका है. लिहाजा कमेटी का गठन भी नहीं हो सका है.

इस कमेटी में पुलिस व नगरपालिका या निगम के प्रतिनिधियों के अलावा हॉकर के प्रतिनिधि भी रहेंगे. हॉकरों के फुटपाथ घेरने के सवाल पर वह कहते हैं कि कर्तव्य तथा अधिकार, एक दूसरे से संबंधित हैं. अगर हॉकरों को उनका कानूनी अधिकार नहीं मिला है तो उन पर दोषारोपण कैसे किया जा सकता है? हॉकरों के टैक्स न देने के सवाल पर हॉकर संग्राम कमेटी का कहना है कि ‘टैक्स’ तो उन्हें भी देना ही होता है वह भी ‘वसूली’ के नाम पर. श्री घोष ने बताया कि लोकसभा चुनाव के पूर्व टाउन वेंडिंग कमेटी के गठन की दिशा में काम हुआ था. संभव है कि इसके गठन की प्रक्रिया में अब तेजी आ सके.

कमेटी के रवैये से स्पष्ट है कि जब तक टाउन वेंडिंग कमेटी, हॉकरों के संबंध में नियम तय करके उसे लागू नहीं कर देती तब तक फुटपाथ पर, भले उसके कुछ ही हिस्से में सही, आराम से चलने का आम लोगों का सपना, जल्द पूरा होता नहीं दिखता.

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