कोलकाता : पिछले छह दिनों से जारी सरकारी चिकित्सकों का धरना प्रदर्शन मंगलावर को समाप्त हुअा. इससे पहले धरना स्थल पर ही चिकित्सकों की ओर से एक संवाददाता सम्मेलन आयोजित की गयी, जहां सर्विस डॉक्टर फोरम के महासचिव डॉ सजल विश्वास ने संवाददाताओं को संबोधित करते हुए बताया कि राज्य विभिन्न ग्रामीण स्तर के अस्पतालों में 93 फीसदी विशेषज्ञ चिकित्सकों का अभाव है.
कई पद रिक्त पड़े हुए थे. वहीं इस वर्ष विभिन्न सरकारी अस्पतालों में सेवा दे रहे 105 चिकित्सकों को मास्टर इन मेडिसिन (एमडी) तथा मास्टर इन सर्जरी(एमएस) करने का मौका नहीं दिया गया है. उन्होंने कहा कि सभी 105 चिकित्सक नेशनल एलिजबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (एनइइटी) परीक्षा में सफल रहे हैं. इसके बाद भी इन्हें राज्य सरकार उच्च शिक्षा के लिए अवसर प्रदार नहीं कर रही है.
उच्च शिक्षा के लिए सरकारी चिकित्सक गत छह दिनों से धरना पर थे. लेकिन हमारी सुध लेने के लिए ना मुख्यमंत्री और ना ही स्वास्थ्य विभाग के किसी अाला अधिकारियों के पास समय था. डॉ विश्वास ने राज्य सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि टीवी सिरियल के बंद होने पर सरकार चिंतित हो गयी और उनकी समस्याओं का समाधान किया. लेकिन हमारी समस्याओं को सुनने के लिए उनके पास समय नहीं है. उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा के लिए एमडी एमस में दाखिला लेने के लिए उम्मीदवारों ने सैट व हाइकोर्ट में मामला किया था.
लेकिन कोर्ट के निर्देश को भी नहीं मान रही है. अब सरकार इस मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट जा रही है. हमें देश की न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है. उन्होंने कहा कि जब तक हमें न्याय नहीं मिलता तब तक हम वृहत्तर आंदलोन को जारी रखेंगे. अगर इस दौरान राज्य की सरकरी स्वास्थ्य व्यवस्था प्रभावित होती है ,तो इसके लिए सरकार जिम्मेवार होगी.
विदित हो कि राज्य में विभिन्न विषय में पोस्ट ग्रेजुएट के लिए करीब 1300 सीटें हैं. इनमें राज्य सरकार के कोटे में करीब 348 सीटें हैं. इसके बावजूद इस वर्ष मात्र 180 चिकित्सकों को ही पोस्ट ग्रेजुएट करने का मौका मिला है, जबकि 105 दाखिला नहीं मिला है. इस विषय को लेकर कई बार राज्य स्वास्थ्य विभाग को ज्ञापन सौंपा गया है. लेकिन समस्या जस के तस बनी हुई है. गौरतलब है कि चिकित्सक गत छह दिनों से सर्विस डॉक्टर फोरम तथा मेडिकल सर्विस सेंटर के बैनर तले धरना पर थे.
