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Bengal Chunav 2021 से पहले मिथुन चक्रवर्ती के भाजपा में शामिल होने पर दिलीप घोष ने कही यह बात

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
मुंबई में मिथुन-मोहन भागवत मुलाकात से बंगाल की राजनीति में अटकलों का बाजार गर्म.
मुंबई में मिथुन-मोहन भागवत मुलाकात से बंगाल की राजनीति में अटकलों का बाजार गर्म.
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कोलकाता : बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 से पहले फिल्म एक्टर मिथुन चक्रवर्ती के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने की चर्चा तेज हो गयी है. खासकर संघ प्रमुख मोहन भागवत के मिथुन चक्रवर्ती से मुलाकात के बाद. इस संबंध में बंगाल बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने भी कुछ बातें कहीं हैं.

दिलीप घोष से जब पूछा गया कि क्या मिथुन चक्रवर्ती बंगाल चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने वाले हैं. इस पर श्री घोष ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) एक गैर-राजनीतिक संगठन है. उसके प्रमुख देश भर के विशिष्ट लोगों से मुलाकात करते रहते हैं. इससे पहले सुब्रत भट्टाचार्य जैसे बंगाल के प्रतिष्ठित लोगों से मुलाकात की है. उनके घर भोजन किया है.

श्री घोष ने पत्रकारों से कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उसके पदाधिकारी की गतिविधियों को भाजपा से जोड़कर खिचड़ी न पकायें. संघ विशुद्ध गैर-राजनीतिक संगठन है. भाजपा उससे पूरी तरह से अलग है. मिथुन चक्रवर्ती भाजपा में शामिल होंगे या नहीं होंगे, यह मिथुन और बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व को तय करना है.

चर्चा है कि ममता बनर्जी को टक्कर देने के लिए भाजपा का शीर्ष नेतृत्व सौरभ गांगुली और मिथुन चक्रवर्ती जैसे बंगाल के लोकप्रिय चेहरे को अपना मुख्यमंत्री कैंडिडेट बनाने पर विचार कर रहा है. संघ प्रमुख मोहन भागवत की मिथुन चक्रवर्ती से मुलाकात को इसी से जोड़कर देखा जा रहा था.

उल्लेखनीय है कि बंगाल में अप्रैल-मई में विधानसभा चुनाव कराये जा सकते हैं. चुनावों की तारीखों की कभी भी घोषणा हो सकती है. इस बीच, सभी दलों के नेता और कार्यकर्ता अपनी-अपनी पार्टी का एजेंडा लेकर लोगों के बीच पहुंचने लगे हैं. सभी पार्टियों ने अपने प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ प्रचार तेज कर दिया है.

सत्ताधारी दलों के करीबी रहे हैं मिथुन चक्रवर्ती

मिथुन चक्रवर्ती बंगाल की सभी सत्ताधारी दलों के करीबी रहे हैं. वाम मोर्चा के मुख्यमंत्री ज्योति बसु और बुद्धदेव भट्टाचार्य हों या तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ममता बनर्जी. ज्योति बसु को मिथुन दा अंकल कहते थे. ममता बनर्जी ने उन्हें राज्यसभा तक भेज दिया. हालांकि, सारधा चिट फंड घोटाला में उनका नाम घसीटा गया, तो मिथुन दा ने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया.

मिथुन को करना पड़ा ता राजनीति से किनारा

इतना ही नहीं, मिथुन चक्रवर्ती ने सारधा ग्रुप ऑफ कंपनीज से लिये गये 1.2 करोड़ रुपये वापस कर दिये और राजनीति से तौबा कर ली. ये 1.2 करोड़ रुपये कंपनी ने मिथुन चक्रवर्ती को उनकी सेवाओं के बदले दिये थे. पैसे उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय में जमा करा दिये, जो पूरे घोटाले की जांच कर रही है.

Posted By: Mithilesh Jha

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