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बंगाल चुनाव 2021: सातवें और आठवें चरण के मतदान से पहले कोरोना बना चुनावी मुद्दा

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
बंगाल में चुनावी मुद्दा बना कोरोनावायरस का संक्रमण
बंगाल में चुनावी मुद्दा बना कोरोनावायरस का संक्रमण
Prabhat Khabar

कोलकाता : पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के दौरान अचानक से आयी कोरोना की दूसरी लहर ने राजनीतिक पार्टियों का मुद्दा ही बदल दिया. अब सभी पार्टियों के लिए कोरोना ही अहम मुद्दा है. पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस, वैक्सीन व ऑक्सीजन की कमी को लेकर भाजपा पर हमलावर हो रही है.

दूसरी तरफ भाजपा का कहना है कि कोरोना का नियंत्रण करने के लिए प्रधानमंत्री ने पिछले कुछ महीनों में सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ कई बैठकें की, लेकिन पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने एक भी बैठक में हिस्सा नहीं लिया. यह दर्शाता है कि मुख्यमंत्री ने इसे गंभीरता से नहीं लिया.

अब हालात तो बता रहे हैं कि बंगाल के अंतिम दो चरणों के चुनाव में कोरोना पार्टियों का खेल बदल सकता है. बंगाल में अब तक छह चरणों में 294 विधानसभा सीटों में से 223 के लिए मतदान हो चुका है. बाकी दो चरणों में अभी भी 69 सीटों के लिए वोट पड़ने बाकी हैं.

कोरोना संक्रमण की वजह से 2 उम्मीदवारों की मौत हो चुकी है. इसलिए दोनों सीटों का चुनाव रद्द करना पड़ा. अब वहां 16 मई को वोट पड़ेंगे. पहले यहां 26 अप्रैल को वोटिंग होनी थी. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बंगाल में अगली सरकार तय करने में यही सीटें निर्णायक साबित होंगी.

सत्तारूढ़ तृणमूल ने बदली अपनी रणनीति

कोरोना का प्रकोप बढ़ते ही तृणमूल कांग्रेस ने अपने चुनाव प्रचार की रणनीति बदल दी. मुख्यमंत्री व पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने तुरंत चुनाव आयोग से बाकी चरणों का मतदान एक साथ कराने की मांग कर डाली. तृणमूल शुरू से ही आठ चरणों में मतदान का विरोध कर रही थी. कोरोना की वजह से उसे मौका भी मिल गया.

भाजपा मतदान के बाकी चरणों में कटौती नहीं चाह रही, क्योंकि ऐसा होने पर वह अंतिम दौर की रणनीति को अमलीजामा नहीं पहना पायेगी. तृणमूल नेताओं ने तो अब चुनाव आयोग के खिलाफ ही अभियान छेड़ दिया है और उनका कहना है कि चुनाव आयोग अगर बाकी दो चरणों के चुनाव को एक साथ करा दे, तो बंगाल में संक्रमण को फैलने से रोका जा सकता है.

कोरोना की दूसरी लहर का ठीकरा केंद्र पर फोड़ा

तृणमूल कांग्रेस ने कोरोना की दूसरी लहर के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया है. उनका कहना है कि केंद्र सरकार की उदासीनता की वजह से कोरोना फिर से पांव पसार रहा है. इसके साथ ही तृणमूल कांग्रेस ने वैक्सीन व ऑक्सीजन की कमी के लिए केंद्र सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है.

दूसरी तरफ, कटमनी व भ्रष्टाचार के मुद्दों से तृणमूल पर वार करती आ रही भाजपा ने फिलहाल इसे ताक पर रख दिया है. कोरोना से निबटने में केंद्र सरकार की सफलता गिनाने में जुट गयी है. भाजपा ने बंगाल में ‘मेरा बूथ, कोरोना मुक्त’ अभियान भी शुरू किया है, जिसके तहत पार्टी छह करोड़ मास्क बांटेगी.

राजनीतिक विश्लेषक विश्वनाथ चक्रवर्ती ने बताया कि बाकी दो चरणों के चुनाव में कोरोना का मुद्दा ही ज्यादा हावी रहेगा. इसलिए भाजपा को तृणमूल कांग्रेस के सवालों का प्रखर रूप से जवाब देना होगा. भाजपा को जितने आक्रामक तरीके से कोरोना को लेकर तृणमूल के वार का जवाब देना चाहिए, वैसा होता नहीं दिख रहा है. इसलिए भाजपा को अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए कोरोना मुद्दे पर अपनी बातों को स्पष्ट रूप से राज्य के मतदाताओं के पास पहुंचाना होगा.

भाजपा ने चुनाव प्रचार में की कटौती

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुरू से ही अपनी रणनीति के तहत पश्चिम बंगाल में धुआंधार प्रचार अभियान चलाया है, लेकिन कोरोना के बढ़ते संक्रमण के कारण राज्य में मोदी-शाह के चुनाव प्रचार में कटौती से भाजपा की लय बिगड़ सकती है.

इन दोनों दिग्गज नेताओं के पिछले चरणों की तरह नियमित रूप से बंगाल आकर चुनाव प्रचार नहीं करने से भाजपा कार्यकर्ताओं का मनोबल भी गिर सकता है, क्योंकि यहां चुनाव प्रचार का सारा दारोमदार अब तक मोदी-शाह ही संभाल रहे थे. ऐसे में पश्चिम बंगाल भाजपा नेतृत्व के सामने अगले चरणों के चुनाव तक पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाये रखना बड़ी चुनौती होगी.

Posted By : Mithilesh Jha

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Published Date

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