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ममता बनर्जी के 30 दिन, CM बनने के बाद हिंसा पर घिरी दीदी, यास भी गुजरा, छोड़ गया सियासी बवंडर

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
ममता बनर्जी के सीएम बनने के 30 दिन पूरे
ममता बनर्जी के सीएम बनने के 30 दिन पूरे
पीटीआई (फाइल फोटो)

Mamata Banerjee News: पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के राज्य की बागडोर संभालने के एक महीने हो चुके हैं. एक महीने पहले 5 मई को ममता बनर्जी को तीसरी बार पश्चिम बंगाल के सीएम पद की शपथ दिलाई गई थी. बंगाल की राजनीति की माहिर खिलाड़ी ममता बनर्जी शुरुआत से चैंपियन रही हैं. इस बार सत्ता में हैट्रिक बनाने वाली ममता बनर्जी के लिए सीएम बनते ही मुश्किलें शुरू हो गईं. इस एक महीने में कई मुद्दों पर सीएम ममता बनर्जी की आलोचना हुई. हिंसा से लेकर यास चक्रवात पर ममता बनर्जी सरकार की खूब फजीहत हुई.

इस बार सत्ता में हैट्रिक बनाने वाली ममता बनर्जी के लिए सीएम बनते ही मुश्किलें शुरू हो गईं. इस एक महीने में कई मुद्दों पर सीएम ममता बनर्जी की आलोचना हुई.

बंगाल की सीएम बनने के बाद ममता बनर्जी के लिए असली चुनौती सत्ता की बागडोर संभालना और कानून व्यवस्था का राज स्थापित करना था. नंदीग्राम सीट से चुनाव हारने के बावजूद ममता बनर्जी सीएम बनी हैं. अब, अपनी होम सीट भवानीपुर से ममता बनर्जी उप चुनाव लड़ेंगी. पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव रिजल्ट के बाद जारी हिंसा को लेकर भी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर बंगाल से लेकर देश की राजधानी दिल्ली तक निशाना साधा गया. गवर्नर जगदीप धनखड़ ने भी शपथ ग्रहण समारोह के तुरंत बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को राजधर्म की याद भी दिलाई थी.

नंदीग्राम सीट से चुनाव हारने के बावजूद ममता बनर्जी सीएम बनी हैं. अब, अपनी होम सीट भवानीपुर से ममता बनर्जी उप चुनाव लड़ेंगी.

राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने हिंसा प्रभावित इलाकों का दौरा किया और प्रभावितों से भी मिले. दूसरी तरफ हिंसा के बाद बंगाल छोड़कर असम में रह रहे प्रभावितों से मुलाकात करके इंसाफ देने का भरोसा दिया. ममता बनर्जी गवर्नर का विरोध करती रहीं और बाद दिल्ली तक पहुंच गई. केंद्रीय गृह मंत्रालय की टीम बंगाल के दौरे पर पहुंची. बंगाल हिंसा का मामला सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा. ममता बनर्जी अपनी बात कहती रहीं और आज भी हिंसा पर उनसे सवाल पूछे जा रहे हैं

बीजेपी का दावा है कि बंगाल चुनाव के नतीजों के बाद जारी हिंसा में एक दर्जन से ज्यादा पार्टी कार्यकर्ताओं की मौत हुई है. इस मामले को लेकर ममता बनर्जी की खूब आलोचना भी हुई है. सौ से अधिक शिक्षाविदों ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लेकर इंसाफ की गुहार भी लगाई है. पिछले दिनों ग्रुप ऑफ इंटेलेक्चुअल्स ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को रिपोर्ट सौंपकर बंगाल हिंसा पर गंभीर खुलासा किया था.

ग्रुप ऑफ इंटेलेक्चुअल्स की रिपोर्ट ‘खेला इन बंगाल 2021: शॉकिंग ग्राउंड स्टोरीज’ (Khela In Bengal 2021: Shocking Ground Stories) में जिक्र है कि बीजेपी के हिंदू मतदाताओं पर टीएमसी समर्थकों ने खूब ज्यादती की है. यहां तक कि पश्चिम बंगाल चुनाव में बीजेपी का समर्थन करने और वोट देने वाली महिलाओं को भी नहीं छोड़ा गया है.

ममता बनर्जी को सबसे ज्यादा दिक्कत यास चक्रवात के बाद पैदा हुए हालात से निपटने में हो रही है. 26 मई को यास चक्रवात ने ओड़िशा के साथ पश्चिम बंगाल में जमकर तबाही मचाई थी. यास गुजरने के बाद जो सियासी बवंडर खड़ा हुआ, वो आज भी जारी है. यास चक्रवात पर पीएम नरेंद्र मोदी की समीक्षा बैठक से गायब रहने पर सीएम ममता बनर्जी और उनके तत्कालीन मुख्य सचिव आलापन बंद्योपाध्याय को निशाने पर लिया गया. केंद्र सरकार ने आलापन बंद्योपाध्याय से शोकॉज भी पूछ डाला. एक दिन पहले गुरुवार को आलापन बंद्योपाध्याय ने शोकॉज का जवाब दिया था. फिलहाल, सीएम के मुख्य सलाहकार के रूप में काम कर रहे आलापन बंद्योपाध्याय के मामले में पश्चिम बंगाल से लेकर दिल्ली तक सियासी खींचतान और बयानों का दौर जारी है.

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