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ममता बनर्जी के करीबी अनुब्रत मंडल को हाईकोर्ट से झटका, मवेशी तस्करी केस में सीबीआई करेगी पूछताछ

वकीलों ने अदालत में दलील दी थी कि उनके मुवक्किल को कई बीमारियां हैं. अनुब्रत मंडल के वकीलों ने आग्रह किया था कि सीबीआई को बीरभूम जिले के बोलपुर में उनके आवास से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये उनसे पूछताछ करने का निर्देश दिया जाये.

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
मवेशी तस्करी केस में अनुब्रत मंडल से सीबीआई करेगी पूछताछ
मवेशी तस्करी केस में अनुब्रत मंडल से सीबीआई करेगी पूछताछ
File Photo

कोलकाता: कलकत्ता हाईकोर्ट (Calcutta High Court) से ममता बनर्जी के करीबी तृणमूल कांग्रेस नेता अनुब्रत मंडल (Anubrata Mondal) को तगड़ा झटका लगा है. हाईकोर्ट ने मवेशी तस्करी मामले में श्री मंडल की याचिका को खारिज दिया. इससे अनुब्रत मंडल की मुश्किलें बढ़ गयी हैं. अब उन्हें सीबीआई के समक्ष पेश होना ही होगा.

हाईकोर्ट से लगा झटका

कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश प्रकाश श्रीवास्तव और जस्टिस राजर्षि भारद्वाज की खंडपीठ ने कहा कि उसे सीबीआई के नोटिस के संबंध में अनुब्रत मंडल को राहत देने से इंकार करने के हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के पूर्व के आदेश में दखल देने का कोई आधार नजर नहीं आता.

मवेशी तस्करी मामले में होगी पूछताछ

गौरतलब है कि राज्य में मवेशी तस्करी मामले की जांच सीबीआई कर रही है और आरोपियों से पूछताछ के दौरान बीरभूम जिला के तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष अनुब्रत मंडल का नाम भी सामने आया है. मामले में पूछताछ के लिए उन्हें तलब किया है. इसके खिलाफ अनुब्रत मंडल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, लेकिन हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने अनुब्रत मंडल को राहत देने से इंकार कर दिया था.

सिंगल बेंच के आदेश को दी थी चुनौती

इसके बाद तृणमूल नेता ने सिंगल बेंच के आदेश को खंडपीठ के समक्ष चुनौती दी थी. श्री मंडल के वकीलों ने अदालत में दलील दी थी कि उनके मुवक्किल को कई बीमारियां हैं. अनुब्रत मंडल के वकीलों ने आग्रह किया था कि सीबीआई को बीरभूम जिले के बोलपुर में उनके आवास से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये उनसे पूछताछ करने का निर्देश दिया जाये.

सुरक्षा कवच देने से कोर्ट का इंकार

श्री मंडल की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा और वकील संजीब दान ने कहा था कि वह मामले में आरोपी नहीं हैं और जांच में सहयोग करने के लिए तैयार हैं. अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था. मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने फैसला सुनाते हुए तृणमूल नेता की याचिका खारिज कर दी और उन्हें किसी भी प्रकार का रक्षाकवच देने से इंकार कर दिया.

रिपोर्ट- मुकेश तिवारी

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