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बेटी की नियुक्ति में बुरे फंसे शिक्षा राज्यमंत्री परेश अधिकारी, सीबीआई करेगी पूछताछ

हाईकोर्ट के न्यायाधीश अभिजीत गांगुली ने निर्देश दिया कि मंत्री आरोपों के संबंध में पूछताछ के लिए मंगलवार रात आठ बजे तक सीबीआई प्राधिकारियों के समक्ष पेश हों.

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
जस्टिस अभिजीत गांगुली ने मुख्यमंत्री व राज्यपाल से उक्त मंत्री को पद से हटाने का अनुरोध किया
जस्टिस अभिजीत गांगुली ने मुख्यमंत्री व राज्यपाल से उक्त मंत्री को पद से हटाने का अनुरोध किया
File Photo

कोलकाता: कलकत्ता हाईकोर्ट ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को पश्चिम बंगाल के शिक्षा राज्य मंत्री परेश चंद्र अधिकारी से राज्य सरकार द्वारा सहायता प्राप्त एक स्कूल में अपनी बेटी की नियुक्ति कराने संबंधी आरोपों को लेकर पूछताछ करने का मंगलवार को निर्देश दिया. एक याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि भर्ती परीक्षा में मंत्री की बेटी से अधिक अंक हासिल करने के बावजूद उसे नौकरी नहीं दी गयी.

अदालत ने इसी याचिका पर सुनवाई के दौरान सीबीआई को यह आदेश दिया. मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के न्यायाधीश अभिजीत गांगुली ने निर्देश दिया कि मंत्री आरोपों के संबंध में पूछताछ के लिए मंगलवार रात आठ बजे तक सीबीआई प्राधिकारियों के समक्ष पेश हों. कक्षा नौवीं व दसवीं के बाद अब हाईकोर्ट के जज जस्टिस अभिजीत गांगुली ने 11वीं व 12वीं कक्षा में शिक्षकों की नियुक्ति में कथित धांधली की जांच का जिम्मा भी सीबीआई को सौंप दिया.

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील फिरदौर शमीम ने दावा किया कि उनकी मुवक्किल ने भर्ती परीक्षा में 77 अंक हासिल किये थे, जबकि मंत्री की बेटी को केवल 61 अंक मिले थे.

मुख्यमंत्री व राज्यपाल से मंत्री को पद से हटाने का अनुरोध

इसके साथ ही जस्टिस अभिजीत गांगुली ने मुख्यमंत्री व राज्यपाल से उक्त मंत्री को पद से हटाने का अनुरोध किया. जज ने कहा कि वह मंत्री को पद से हटाने का निर्देश नहीं दे रहे हैं. मंत्री को पद से हटाने की सिफारिश सिर्फ इसलिए की जा रही है, क्योंकि इससे जांच निष्पक्ष व पारदर्शी तरीके से हो पायेगी. इसके साथ ही न्यायाधीश ने सीबीआई को मामले की गहराई में जाकर जांच करने का निर्देश दिया, ताकि सच्चाई सामने आ सके.

इसके साथ ही हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) के चेयरमैन से भी जवाब तलब किया और उनको वर्चुअल माध्यम से सुनवाई में मौजूद रहने का आदेश दिया. हाईकोर्ट के निर्देश पर एसएससी चेयरमैन वर्चुअल माध्यम से सुनवाई में उपस्थित रहे.

गौरतलब है कि इससे पहले भी जस्टिस अभिजीत गांगुली चार मौकों पर राज्य के सरकारी और सरकार से सहायता प्राप्त विद्यालयों में शिक्षक और गैर शिक्षक कर्मचारियों की नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं के संबंध में सीबीआई जांच के आदेश दे चुके हैं. उन्होंने राज्य के पूर्व शिक्षा पार्थ चटर्जी को पूछताछ के लिए एजेंसी के समक्ष पेश होने का आदेश दिया था, लेकिन एक खंडपीठ ने बाद में इस आदेश पर रोक लगा दी थी.

पार्थ चटर्जी वर्तमान में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली कैबिनेट के उद्योग, वाणिज्य और संसदीय मामलों के मंत्री हैं. हाईकोर्ट द्वारा गठित एक समिति ने 13 मई को अदालत को अपनी एक रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें कहा गया है कि पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा संचालित या वित्त पोषित विद्यालयों में ग्रुप-सी के पदों पर 381 अवैध नियुक्तियां की गयी हैं.

समिति ने विद्यालय सेवा आयोग (एसएससी) के चार पूर्व राज्य अधिकारियों और पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (डब्ल्यूबीबीएसइ) के निवर्तमान अध्यक्ष के खिलाफ आपराधिक मुकदमे शुरू करने की सिफारिश की.

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