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भवानीपुर उपचुनाव से पहले ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी को झटका, स्पीकर को कलकत्ता हाईकोर्ट की फटकार

Mukul Roy|Calcutta High Court|कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल विधानसभा के स्पीकर से कहा है कि आप बतायें कि शुभेंदु अधिकारी की याचिका पर अब तक आपने क्या कार्रवाई की.

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
कलकत्ता हाइकोर्ट से ममता को लगा तगड़ा झटका
कलकत्ता हाइकोर्ट से ममता को लगा तगड़ा झटका
Prabhat Khabar

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में 30 सितंबर को भवानीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से ठीक पहले कलकत्ता हाईकोर्ट ने ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस तगड़ा झटका दिया है. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) छोड़कर सत्तारूढ़ पार्टी टीएमसी में शामिल होने वाले विधायक मुकुल रॉय की सदस्यता पर बंगाल विधानसभा के स्पीकर से 7 अक्टूबर तक एक्शन टेकेन रिपोर्ट देने के लिए कहा है.

कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल विधानसभा के स्पीकर से कहा है कि आप बतायें कि शुभेंदु अधिकारी की याचिका पर अब तक आपने क्या कार्रवाई की. अगर आप ऐसा करने में विफल रहते हैं, तो हम मुकुल राय की सदस्यता रद्द करने के मामले में अपनी कार्रवाई शुरू करेंगे. जून 2021 में बीजेपी विधायक दल के नेता शुभेंदु अधिकारी ने स्पीकर को चिट्ठी लिखकर मुकल राय की सदस्यता रद्द करने की मांग की थी.

स्पीकर ने शुभेंदु की चिट्ठी पर कार्रवाई करने की बजाय मुकुल राय को विधानसभा की लोक लेखा समिति (पीएसी) का चेयरमैन नियुक्त कर दिया. बीजेपी ने इसका विरोध किया, तो स्पीकर ने कहा कि उन्होंने जो कुछ भी किया है, नियम के दायरे में रहकर किया है. वहीं, ममता बनर्जी ने कहा था कि पीएसी अध्यक्ष का पद विपक्षी पार्टी के विधायक को देने की परंपरा है. हमने बीजेपी विधायक मुकुल राय को पीएसी का चेयरमैन बनाया है. इसमें बीजेपी को क्या समस्या है.

कलकत्ता हाईकोर्ट के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल ने पश्चिम बंगाल विधानसभा के स्पीकर की उस दलील को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि हाईकोर्ट को विधानसभा के मामले में दखल देने का कोई अधिकार नहीं है. अपने 69 पन्ने के फैसले में जस्टिस राजेश बिंदल ने स्पीकर को कड़ा संदेश दिया है. जस्टिस बिंदल ने कड़े शब्दों में कहा कि अगर यह मामला ‘प्रक्रियात्मक अनियमितता’ का होता, तो हम हाईकोर्ट को इसकी सुनवाई करने की अनुमति नहीं देते.

जस्टिस बिंदल एवं जस्टिस राजर्षि भारद्वाज की खंडपीठ ने कहा कि यह मामला प्रक्रियात्मक अनियमितता का नहीं, बल्कि नियमों के ‘घोर उल्लंघन’ का है. स्पीकर ने डिक्टेटर की तरह व्यवहार किया. वह अपने ही बुने जाल में फंस गये हैं. खंडपीठ ने यह भी कहा कि उन्होंने संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन नहीं किया. हाईकोर्ट बीजेपी के विधायक अंबिका राय की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई कर रहा था.

अंबिका राय ने मुकुल राय को लोक लेखा समिति (पीएसी) का चेयरमैन नियुक्त किये जाने के स्पीकर के फैसले को चुनौती दी थी. सोमवार को बंगाल विधानसभा में बीजेपी के नेता शुभेंदु अधिकारी ने भी इस मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की और दलबदल कानून के तहत बीजेपी विधायक मुकुल राय, जो अब औपचारिक रूप से तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं, की विधानसभा की सदस्यता रद्द करने की मांग की.

Posted By: Mithilesh Jha

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Published Date

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