पीआर के सहारे प्रदर्शन की पब्लिसिटी

By Prabhat Khabar Digital Desk
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पार्क सर्कस में सभा के लिए पीआर एजेंसी ने भेजा आमंत्रण

पार्क सर्कस में सीएए के खिलाफ चल रहा है प्रदर्शन
कोलकाता : विभिन्न कार्यक्रमों की पब्लिसिटी के लिए बिजनेस कंपनियां पीआर (पब्लिक रिलेशंस) एजेंसियों की मदद लेते रही हैं. हाल में दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान भी विभिन्न राजनीतिक दलों ने अपने प्रचार के लिए खुलकर पीआर एजेंसियों की मदद ली थी, लेकिन अब नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) का विरोध करने वाले संगठन भी अपनी पब्लिसिटी के लिए कोलकाता में पीआर एजेंसी का दामन थामा है.
उल्लेखनीय है कि नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ देश के कई शहरों में प्रदर्शन जारी है. इसमें दिल्ली का शाहीन बाग के प्रदर्शन के तर्ज पर कोलकाता के पार्क सर्कस मैदान में सीएए के विरोध में धरना-प्रदर्शन चल रहा है. शुक्रवार को अपराह्न साढ़े तीन बजे पार्क सर्कस में सीएए व एनआरसी के ‍विरोध में प्रसिद्ध चित्रकार वसीम आर कपूर की आगुवाई में बुद्धिजीवियों की एक सभा बुलायी थी. इस सभा का आमंत्रण पीआर एजेंसी के माध्यम से मीडियाकर्मियों को भेजा गया.
श्री कपूर का कहना है कि इस सभा में चित्रकार, लेखक, प्रोफेसर, गायक सहित विभिन्न पेशे से जुड़े बुद्धिजीवी व आम लोग शामिल हुए. सीएए व एनआरसी संविधान के खिलाफ है और वह भारत की जनतांत्रिक व धर्मनिरपेक्ष भावना के खिलाफ है.
हालांकि बंगाल में सीएए और एनआरसी का विरोध आम है. सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस भी लगातार इनके खिलाफ आंदोलन कर रही हैं, लेकिन पहली बार विरोध प्रदर्शन की पब्लिसिटी के लिए पीआर एजेंसी की मदद ली गयी है तथा पीआर एजेंसी की मदद से आमंत्रण पत्र विभिन्न मीडियाकर्मी को भेजे गये हैं. हालांकि संबंद्ध पीआर एजेंसी का कहना है कि चूंकि चित्रकार वसीम कपूर उनके मित्र हैं. इस कारण उन्हें उनके कार्यक्रम का आमंत्रण पत्र मीडियाकर्मियों को भेजा है. इसका प्रोफेशन से कुछ लेना-देना नहीं है और न ही यह उनके विचारों का प्रतिनिधित्व करता है.
दूसरी ओर, अन्य पीआर प्रोफेशनल मनीत सिंह का कहना है : मुझे भी पिछले दो माह में सीएए और एनआरसी की विरोध रैली के लिए पीआर करने के लिए एप्रोच किया गया था. मुझे ऐसे लगभग आठ प्रस्ताव मिल चुके हैं. इस बाबत वे मुझे चार्ज भी देने के लिए राजी थे, लेकिन मैंने इसे स्वीकार नहीं किया.
दूसरी ओर, भाजपा के नेताओं का कहना है कि चूंकि अब इन विरोध प्रदर्शन में लोग शामिल नहीं हो रहे हैं. लोग समझ गये हैं कि इसका राजनीतिक उद्देश्य है तथा यह लंबे समय से पीड़ित शरणार्थियों को अधिकार देगा. लोग आंदोलनकारियों की मंशा समझ गये हैं. इस कारण ही आंदोलनकारियों को अपने प्रचार के लिए की मदद लेनी पड़ रही है.
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