गुजरता वर्ष 2019 : डेंगू और जूनियर डॉक्टरों ने बिगाड़ी सरकार की सेहत

By Prabhat Khabar Digital Desk
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शिव कुमार राउत, कोलकाता : राज्य के स्वास्थ्य विभाग के लिए 2019 सामान्य रहा. इस वर्ष जहां एक ओर एसएसकेएम (पीजी) में पहली बार हृदय प्रत्यारोपण हुआ. वहीं अत्याधुनिक चिकित्सकीय उपकरण से युक्त पूर्वी भारत का एक मात्र लेवल वन ट्राॅमा केयर सेंटर खोला गया. इसी वर्ष सरकार को जूनियर डॉक्टरों से भी लोहा लेना पड़ा. डॉक्टरों की हड़ताल की वजह से एक सप्ताह तक सरकारी अस्पताल में कामकाज ठप रहा. वहीं डेंगू के डंक से इस वर्ष भी सरकार परेशान रही.

पीजी में पूर्वी भारत का सबसे बड़ा ट्रॉमा केयर सेंटर:
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने डॉक्टर्स डे पर राज्यवासियों को सौगात देते हुए पीजी के 10 मंजिला ट्रॉमा केयर सेंटर का उद्घाटन किया. 244 वेड की क्षमतावाले ट्रॉमा केयर में ग्रीन, येलो व रेड तीन जोन बनाये गये हैं.
ग्रीन जोन में ऐसे मरीजों का इलाज किया जायेगा, जिन्हें भर्ती रखने की आवश्यकता नहीं होगी, जबकि येलो जोन में सर्जरी की आवश्यकता वाले मरीज को रखा जायेगा. वहीं किसी दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को रेड जोन में रखा जायेगा. इस जोन में आईटीयू व क्रिटिकल केयर यूनिट (सीसीयू) की व्यवस्था रखी गयी है.
पहली बार पीजी में हुआ हृदय प्रत्यारोपण :
इस साल पीजी में पहली बार हृदय प्रत्यारोपण किया गया. ध्यान रहे कि महानगर में 21 मई 2018 से अब तक नौ हृदय प्रत्यारोपण हो चुके हैं. पीजी में एक और मेडिकल कॉलेज में तीन हर्ट ट्रांसप्लांट हो चुके हैं.
मई 2018 में पूर्वी भारत के पश्चिम बंगाल में पहली बार हार्ट ट्रांसप्लांट किया गया था. हार्ट ट्रांसप्लांट पर लाखों रुपये का खर्च आता है, लेकिन खुशी की बात यह है कि पश्चिम बंगाल के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में हार्ट ट्रांसप्लांट नि:शुल्क किये जा रहे हैं.
एक सप्ताह तक जूनियर डॉक्टर रहे हड़ताल पर :
जून महीने में एनआरएस मेडिकल कॉलेज में जूनियर डॉक्टर एक सप्ताह तक हड़ताल पर थे. मरीज के परिजन और जूनियर डॉक्टरों के बीच झड़प के कारण एक चिकित्सक बुरी तरह से घायल हुआ था. इस घटना के विरोध में जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर चले गये थे.
एनआरएस के डॉक्टरों को देश भर के चिकित्सकों का समर्थन मिला. अंत में सीएम ममता बनर्जी के साथ जूनियर डॉक्टरों की बैठक हुई. ममता बनर्जी द्वारा हड़ताली चिकित्सकों को राज्य के सरकारी अस्पतालों में सुरक्षा बढ़ाने के कदम उठाने का आश्वासन देने के बाद चिकित्साकर्मियों ने हड़ताल को समाप्त कर दिया.
गुटका व पान मसाला पर प्रतिबंध :
ममता बनर्जी सरकार ने पश्चिम बंगाल में गुटका और पान मसाला पर प्रतिबंध एक साल के लिए बढ़ा दिया. यह फैसला राज्य के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग ने लिया. प्रतिबंध की बढ़ी अवधि सात नवंबर से लागू हो गयी.
राज्य सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग ने 25 अक्तूबर की अधिसूचना के जरिए फैसले का ऐलान किया था. नयी अधिसूचना के मुताबिक, गुटका और तंबाकू/निकोटिन वाले पान मसाला को बनाने, स्टोर करने, बिक्री और वितरण पर एक साल के लिए प्रतिबंध रहेगा.
प्राइवेट डॉक्टरों को राज्य सरकार ने किया याद :
डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए स्वास्थ्य विभाग निजी अस्पतालों के डॉक्टरों से राज्य सरकार ने मदद मांगी है. 26 दिसंबर को स्वास्थ्य विभाग की ओर से निर्देशिका जारी की गयी. ऐसे चिकित्सकों को पारिश्रमिक 1500 रुपये प्रति घंटा दिये जायेंगे. ऐसे चिकित्सक अधिक से अधिक छह घंटा और सप्ताह में तीन दिन मेडिकल कॉलेज, मल्टी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, जिला स्तर के अस्पतालों में सेवा दे सकेंगे.
डेंगू से 27 की मौत, 50 हजार मामले :
राज्य सरकार के अनुसार इस वर्ष करीब 50 हजार लोग डेंगू से प्रभावित हुए. जबकि 27 लोगों की मौत हुई. डेंगू से निपटने के लिए सरकार की ओर से मेडिकल एक्सपर्ट कमेटी गठित की, जबकि लार्वा को नष्ट करने के लिए कोलकाता नगर निगम को ड्रोन उड़ाना पड़ा. इसके बाद भी डेंगू के सामने सरकार की सारी कोशिशें धरी की धरी रह गयीं.
दिसंबर महीने के मध्य तक डेंगू के मामले सामने आते रहे. डेंगू के साथ स्क्रब टाइफस ने भी सरकार को परेशान रखा. इस संक्रमण से इस साल हुगली में‍ एक और मुर्शिदाबाद में करीब तीन लोगों की मौत हुई.
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