कोलकाता : हत्‍यारा है यह पेड़, 162 पेड़ों को खा चुका है ये दानव पेड़

By Prabhat Khabar Digital Desk
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जे कुंदन , हावड़ा : एक पेड़ की अद्भुत गतिविधियों को लेकर शिवपुर आचार्य जगदीश चंद्र बोस बोटेनिकल गार्डेन के वैज्ञानिक परेशान हैं. वर्ष 2014-15 में इस पेड़ की कहानी यहां के वैज्ञानिकों के सामने आयी. कहानी हैरान करनेवाली थी.
बताया जाता है कि अफ्रीका में कुछ पेड़ ऐसे हैं, जो इंसान को निगल जाते हैं, लेकिन अब तक इसका प्रमाण नहीं मिला है. हां, उपन्यासों में ऐसी कुछ कहानियां जरूर पढ़ने को मिली हैं, लेकिन इस ऐतिहासिक बोटेनिकल गार्डेन में एक पेड़ ऐसा है, जो अब तक 162 पेड़ों को निगल चुका है.
वैज्ञानिकों ने इस पेड़ का नाम दानव पेड़ रख दिया है. पेड़ का वैज्ञानिक नाम मोरासी है. इसकी सात प्रजातियां हैं, जिसमें बरगद का पेड़ भी शामिल है. किसी अन्य पेड़ पर मोरासी परिवार के प्रजाति का बीज गिरते ही इस दानव पेड़ का जन्म होने लगता है. वैज्ञानिकों की मानें तो एक पेड़ को निगलने में 30-40 वर्ष का समय लग जाता है. बोलचाल की भाषा में यह पेड़ दूसरे पेड़ का खून सांस रोककर करता है.
वर्ष 2014-15 में हुआ दानव पेड़ का खुलासा
बोटेनिकल गार्डेन के अंदर जितने भी पेड़ लगे हैं, उन सभी पेड़ों का रिकार्ड यहां उपलब्ध है. पेड़ के खत्म होने का भी रिकार्ड यहां दर्ज किया जाता है. रिकार्ड खंगालने के दौरान वैज्ञानिकों को पता चला कि गार्डेन के अंदर 50 साल पुराना एक रूद्राक्ष का पेड़ है, लेकिन वह पेड़ गार्डेन से गायब है.
उसके खत्म होने का भी रिकार्ड गार्डेन के खाते में दर्ज नहीं है. आखिर 50 साल पुराना यह पेड़ इतनी कड़ी सुरक्षा के बाद कैसे गायब हो गया, इसकी पड़ताल शुरू की गयी तो चौंकानेवाला वाकया सामने आया.
पड़ताल में पाया गया कि इस विशाल रूद्राक्ष पेड़ की सांस रोककर हत्या की गयी है. हत्या मोरासी प्रजाति के एक पेड़ ने की है. अध्ययन के दौरान वैज्ञानिकों को यह भी मालूम हुआ कि गार्डेन में मौजूद 250 साल पुराने बरगद के पेड़ का इतिहास कुछ ऐसा ही है. जिस जगह पर बरगद का पेड़ है, वहां पहले खजूर का पेड़ था. बरगद के पेड़ ने खजूर के पेड़ की हत्या की थी. बरगद का पेड़ भी मोरासी परिवार का एक सदस्य है.
कैसे करता है पेड़ का खून
अन्य पेड़ पर मोरासी परिवार के प्रजाति का बीज गिरने के बाद एक नये पेड़ का जन्म होता है. धीरे-धीरे जड़ से लेकर तने तक पेड़ के चारों तरफ एक जाल बनाता है. इसके बाद वह पूरी तरह पेड़ को जकड़ लेता है. जाल के अंदर पेड़ इस कदर फंस जाता है कि धीरे-धीरे वह सूख जाता है. इस पूरी प्रकिया में 30-40 साल तक समय लगता है.
मोरासी प्रजाति के पेड़ का जन्म दूसरे पेड़ पर ही होता है. इस पेड़ को साइलेंट किलर भी कहा जा सकता है. वर्ष 2014-15 में हमारी नजर इस पर पड़ी थी. अब तक यह कई पेड़ों को निगल चुका है. शुरुआत में नजर आने पर इसे रोका जा सकता है, लेकिन यह इतना आसान नहीं है.
बसंत सिंह, वैज्ञानिक, बोटेनिकल गार्डेन.
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