ट्रेन में बैठ कोलकाता से सिंगापुर जाने का सपना होगा सच

By Prabhat Khabar Digital Desk
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कोलकाता: इन दिनों बुलेट ट्रेन के साथ सेमी हाइ स्पीड परियोजना और फ्रेट कॉरिडोर परियोजना के बारे में अक्सर सुनने को मिल जाता है, लेकिन बहुत कम लोग ही जानते हैं कि इन दिनों रेल मंत्रालय अन्य मंत्रालयों के सहयोग से एक एेसी परियोजना पर काम कर रहा है जो सफल हो गया तो कोलकाता से ट्रेन में सवार होकर सिंगापुर जाने का सपना सच हो सकता है. हवाई जहाज से सिंगापुर की सैर तो लोगों ने की होगी लेकिन ट्रेन में बैठकर सिंगापुर की यात्रा तो अभी सपना ही है. कोलकाता-सिंगापुर वाया नार्थ-इस्ट परियोजना को तैयार करने का काम तेजी से चल रहा है. केंद्र सरकार कोलकाता शहर को अंतरराष्ट्रीय प्वाइंट ऑफ व्यू से काफी महत्वपूर्ण मान रही है. पिछले दिनों कोलकाता पधारे भारत सरकार के नीति आयोग के सलाहकार (परिवहन) डॉ मनोज सिंह से हमारे संवाददाता ने इसी मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की. प्रस्तुत है बातचीत के प्रमुख अंश :
प्रश्न. रेल नेटवर्क के हिसाब से आप कोलकाता को कितना महत्वपूर्ण मानते हैं और क्यों?
उत्तर. जहां तक कोलकाता की बात है तो यह शहर अंतरराष्ट्रीय प्वाइंट ऑफ व्यू से काफी महत्वपूर्ण है. देश के पूर्वी राज्य हों या फिर पड़ोसी देश, उनके साथ कनेक्टीविटी के लिहाज से कोलकाता का महत्व दिल्ली से भी ज्यादा है. कोलकाता में बैठकर आप नेपाल, म्यांमार और बांग्लादेश को भी देख सकते हैं.
प्रश्न. रेल नेटवर्क से दूसरे देशों को जोड़ने का कार्य तेजी से चल रहा है? पहले नेपाल फिर बांग्लादेश और अगला देश कौन होगा जिसे रेल मार्ग जोड़ा जायेगा ?
उत्तर. यह सही है कि 2004 में नेपाल को भारत से जोड़ा गया. हाल ही में कोलकाता से बांग्लादेश के लिए दूसरी मैत्री एक्सप्रेस ट्रेन का ट्रॉयल हुआ है. फिलहाल म्यांमार को भी हम रेल लाइन से जोड़नेवाले हैं लेकिन भारत के मणिपुर राज्य की राजधानी के मोरे स्थान से म्यांमार के तामो शहर के मध्य 250 किलो मीटर रेल नेटवर्क नहीं है. यदि दोनों देश मिलकर इसे रेल लिंक से जोड़ने में सफल होते हैं तो पूरा साउथ एशिया हमारे देश से रेल नेटवर्क से जुड़ जायेगा. यानी आनेवाले दिनों में कोलकाता स्टेशन से ट्रेन में सवार होकर सिंगापुर जाया जा सकेगा.
प्रश्न. इस परियोजना की वर्तमान स्थिति क्या है?
उत्तर. रेल मंत्रालय अन्य मंत्रालयों के सहयोग से इस परियोजना पर कार्य कर रहा है. वर्तमान में सर्वे करने और डीपीआर तैयार करने का काम चल रहा है.
प्रश्न. इस महत्वाकांक्षी योजना पर कुलकितना खर्च होने का अनुमान है. इसका वहन केवल भारत करेगा?
उत्तर. एक अनुमान के अनुसार इस प्रोजेक्ट पर लगभग 10 हजार करोड़ रुपये खर्च होने की संभावना है. चूंकि यह एक अंतरराष्ट्रीय परियोजना है. इसके बनने से साउथ एशिया का हर देश इससे लाभान्वित होने वाला है. लिहाजा इस परियोजना के लिए फंड की कोई समस्या नहीं आने वाली. इसमें एशियन डेवलपमेंट बैंक भी फंड देगा.
प्रश्न. मोदी सरकार ने पूर्वोत्तर में नेटवर्क विकास के लिए काफी फंड तो दिया है लेकिन कार्य में वह तेजी नहीं देखने को मिल रही है?
उत्तर. पूर्वोत्तर के सभी राज्यों की रेल लाइनों को दुरुस्त किया जा रहा है. सभी मीटर गेज को ब्रॉड गेज में परिवर्तित किया जा रहा है. ऐसा करके हम ट्रेनों की स्पीड बढ़ाने के साथ उसकी क्षमता में भी वृद्धि कर रहे हैं. ब्रह्मपुर के रंगिया से मुरकौन सेल तक कुल ढाई-तीन हजार किलोमीटर मीटर गेज रेल लाइनों को ब्रॉड गेज में परिवर्तन करने का काम चल रहा है. यह कार्य काफी समय से चल रहा है. इस प्रोजेक्ट के तहत भारत सरकार लगभग 40 हजार करोड़ रुपये खर्च करने जा रही है. वैसे तो पूर्वोत्तर को रेलवे से जोड़ने का काम काफी समय से चल रहा है लेकिन 2013 में केंद्र में नयी सरकार बनने के बाद काम में काफी तेजी आयी है. नयी सरकार ने इस योजना पर ज्यादा फोकस करने के साथ फंड भी ज्यादा आबंटित किया है. इस योजना को 2020 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.
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