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हेडमास्टरों के लिए जी का जंजाल बना राशन बांटना, कई स्कूल प्रमुख हुए संक्रमित

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
हेडमास्टरों के लिए जी का जंजाल बना राशन बांटना, कई स्कूल प्रमुख हुए संक्रमित
हेडमास्टरों के लिए जी का जंजाल बना राशन बांटना, कई स्कूल प्रमुख हुए संक्रमित
Prabhat Khabar

कोलकाता: पूरे देश में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर से दहशत है. राज्य के कई शिक्षक भी संक्रमित हो गये हैं. हाल में कुछ हेडमास्टरों व अन्य शिक्षकों की कोरोना से जान भी चली गयी है. ऐसे में स्कूलों से मिड डे मील का वितरण नहीं हो पा रहा है. राज्य सरकार ने हेडमास्टर या स्कूल प्रमुख को छोड़ अन्य शिक्षकों के स्कूल जाने पर रोक लगा दी है.

स्कूल हेड को कैंपस में जाकर मिड डे मील छात्रों के अभिभावकों को देना पड़ रहा है. इस विषय में कृष्णचंद्रपुर हाइ स्कूल, मथुरापुर के प्रधानाध्यापक डॉ चंदन माइती ने बताया कि स्कूल में शिक्षक नहीं आ सकते, पर प्रति माह मिड डे मील बांटने के लिए स्कूल हेड को आना पड़ता है. हाल मेें खोरिबेरिया हाइ स्कूल, बजबज (दक्षिण 24 परगना) के हेडमास्टर अपूर्व कर्मकार की संक्रमित होने पर मौत हो गयी.

वह बराबर मिड डे मील बांटने के लिए स्कूल जाते थे. इसी तरह पुरुलिया हिंदी हाइ स्कूल की प्रधानाध्यापिका पापिया चटर्जी समेत सात-आठ हेड व अन्य शिक्षक संक्रमित होकर जान गंवा चुके हैं. स्कूल प्रमुखों को संक्रमण से बचाने के लिए सरकार को मिड डे मील के वितरण की वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए.

वहीं, आदर्श माध्यमिक विद्यालय (श्यामबाजार) डॉ एपी राय कहते हैं कि जिस वार्ड में स्कूल है, वहां काफी समय से निगम का सैनिटाइजेशन नहीं हुआ है. ऐसे में हेडमास्टर डरे हुए हैं. मिड डे मील का राशन बांटने के लिए उन्हें स्कूल जाना पड़ता है. स्कूल में सफाई व सैनिटाइजेशन तो हेडमास्टर नहीं करवा सकते. इस मसले पर रिसड़ा विद्यापीठ के हेडमास्टर प्रमोद तिवारी कहते हैं कि सरकार को मिड डे मील का राशन बांटने के लिए राशन दुकान तय कर देनी चाहिए.

उनकी शिकायत है कि स्कूल कैंपस में राशन लेने आ रहे अभिभावन कोरोना नियम नहीं मान रहे. राशन देने के पहले स्कूल रजिस्टर पर अभिभावकों का हस्ताक्षर कराया जाता है. इससे भी संक्रमण का खतरा है. राशन बांटने के बाद उनके स्कूल के चार शिक्षक बीमार पड़ गये. इससे अन्य शिक्षक भी दहशत में हैं. सरकारी स्कूल के कुछ हेडमास्टरों का सुझाव है कि स्कूल से मिड डे मील का चावल, दाल, आलू, सोयाबीन, चीनी, साबुन व चना बांटने के बजाय विद्यार्थियों के खाते में सीधे इसकी राशि दे देनी चाहिए. इससे लोगों को संक्रमण से बचाया जा सकता है.

Posted By: Aditi Singh

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Published Date

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