अवैध पत्थर खदान बंद होने से आदिवासियों का विरोध

वन विभाग की ओर से अवैध पत्थर उत्खनन बंद कराने के बाद गुरुवार को आदिवासी समुदाय के एक वर्ग ने वैकल्पिक रोजगार की मांग को लेकर वन विभाग के उखड़ा रेंज कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया.

पांडवेश्वर.

वन विभाग की ओर से अवैध पत्थर उत्खनन बंद कराने के बाद गुरुवार को आदिवासी समुदाय के एक वर्ग ने वैकल्पिक रोजगार की मांग को लेकर वन विभाग के उखड़ा रेंज कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि खदानों के बंद होने से उनकी रोजी-रोटी छिन गयी है.

खदानों के बंद होने से छिनी आजीविका

पांडवेश्वर विधानसभा क्षेत्र के दुर्गापुर फरीदपुर प्रखंड के हेतेडोबा बांसहोल, बसिया और बांसगोढ़ इलाके आदिवासी बहुल हैं. यहां की मिट्टी में उच्च गुणवत्ता वाली मरम और बजरी पायी जाती है, जिसकी स्थानीय बाजार में अच्छी मांग रहती है. लंबे समय से इन इलाकों में वैध और अवैध दोनों तरीकों से मरम और बजरी का उत्खनन किया जाता रहा है.

हाल ही में वन विभाग ने अपने क्षेत्र को कंटीले तारों से घेरना शुरू किया, जिसके चलते अवैध खदानें बंद हो गयीं. इन खदानों में अधिकतर आदिवासी मजदूर काम करते थे. अब खदानें बंद होने से सैकड़ों मजदूर बेरोजगार हो गये हैं.

विरोध में उठी वैकल्पिक रोजगार की मांग

विरोध प्रदर्शन में गोविंदा हेमब्रम, सदाशिव भुइयां सहित कई श्रमिक शामिल थे. उन्होंने कहा कि खदानों के बंद होने से उनकी आजीविका प्रभावित हुई है, इसलिए प्रशासन को वैकल्पिक रोजगार की व्यवस्था करनी चाहिए. प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा. वन विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि प्रदर्शनकारियों की मांगों को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया जायेगा और आवश्यक कार्रवाई की जायेगी.

व्यापारियों पर अवैध मुनाफाखोरी के आरोप

स्थानीय निवासियों के एक वर्ग का कहना है कि कुछ व्यापारी लंबे समय से बजरी और मरम की अवैध तस्करी कर करोड़ों रुपये कमा रहे थे. उनका आरोप है कि यही व्यापारी अब अपने निजी हित साधने के लिए विरोध प्रदर्शन के पीछे सक्रिय हैं.

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By AMIT KUMAR

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