कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने दुर्गापुर कार्निवल पर जतायी कड़ी आपत्ति, पुराने विसर्जन पद्धति की बहाली की मांग

उन्होंने कहा कि दुर्गापुर में कार्निवाल का आयोजन कोई नयी परंपरा नहीं है.

देवेश चक्रवर्ती ने तृणमूल सरकार के खर्च पर उठाया सवाल, 1970 के दशक से चली आ रही परंपरा का दिया हवाला सोशल मीडिया के माध्यम से जतायी नाराजगी

आसनसोल. कांग्रेस जिलाध्यक्ष देवेश चक्रवर्ती ने दुर्गापुर में आयोजित दुर्गा पूजा कार्निवाल को लेकर कड़ी आपत्ति जतायी है. उन्होंने कहा कि दुर्गापुर में कार्निवाल का आयोजन कोई नयी परंपरा नहीं है. 1970 के दशक में दुर्गापुर के दो प्रमुख कांग्रेसी नेता आनंद गोपाल मुखर्जी और लावण्या भट्टाचार्य के नेतृत्व में नववरुण क्लब और अग्रणी क्लब अलग-अलग समय पर कार्निवाल का आयोजन किया करते थे.

शनिवार की रात चक्रवर्ती ने फेसबुक पर अपनी बात साझा करते हुए तृणमूल सरकार की आलोचना की और मांग की कि कार्निवाल के नाम पर खर्च किये जा रहे फंड को रोककर पुराने विसर्जन पद्धति को पुनः लागू किया जाये. उन्होंने कहा कि बीते तीन वर्षों में कोलकाता के तर्ज पर नये रूप में आयोजित कार्निवाल के कारण न केवल परंपरा भटक रही है बल्कि जनता की मेहनत की कमाई भी व्यर्थ खर्च हो रही है.

विसर्जन परंपरा का इतिहास और सांस्कृतिक महत्व

चक्रवर्ती ने बताया कि पुराने कार्निवाल में गाजे-बाजे के साथ मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन स्टील टाउनशिप से डीपीएल तक होता था. इस दौरान श्रद्धालु मां के दर्शन कर आशीर्वाद लेते थे और पूरे आयोजन का माहौल उत्साहपूर्ण होता था. उन्होंने कहा कि इस पारंपरिक आयोजन में सांस्कृतिक कार्यक्रम और शोभायात्रा के माध्यम से समुदाय को जोड़ने का भी काम होता था.

सत्ताधारी दल पर आरोप और संस्कृति की चिंता

कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि वर्तमान तृणमूल सरकार कार्निवाल के माध्यम से केवल अपने प्रचार-प्रसार में जुटी है. उन्होंने कहा कि मंच पर विराजमान लोग देवी को सलामी देते हैं, जबकि यह पश्चिम बंगाल की संस्कृति के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है कि मंचासीन अधिकारी देवी के सम्मान में खड़े नहीं होते. चक्रवर्ती ने कहा कि जनता के मेहनत की कमाई का पैसा बर्बाद किया जा रहा है, जबकि राज्य में विकास कार्य और डीए देने के लिए फंड की कमी है. चक्रवर्ती ने जोर देकर कहा कि कांग्रेस पार्टी इस प्रकार के कार्निवाल के लिए धिक्कार व्यक्त करती है और तृणमूल सरकार से पुराने विसर्जन कार्निवाल की बहाली की मांग करती है, ताकि परंपरा और जनता का सम्मान दोनों बना रहे.

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Published by: Ganesh mahto

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