बांकुड़ा.
बांकुड़ा जिले के ओंदा थाना अंतर्गत रतनपुर गांव में सरस्वती पूजा को लेकर खास उत्साह देखा जा रहा है. यह पूजा राज्य के अनोखे आयोजनों में शामिल मानी जाती है, जहां मां सरस्वती की आराधना लगातार नौ दिनों तक की जाती है. पूरा गांव इस दौरान पर्व के रंग में डूबा रहता है.देवी परिवार के साथ पूजन की मान्यता
स्थानीय मान्यता के अनुसार, मां सरस्वती इस गांव में अकेले नहीं आती हैं. नौ दिनों तक प्रवास के कारण वे लक्ष्मी, गणेश, कार्तिक और भगवती को अपने साथ लाती हैं. यही कारण है कि पूजा में देवी के साथ पूरे परिवार का स्मरण किया जाता है और गांव में विशेष धार्मिक वातावरण बना रहता है.
पके कटहल का अनोखा भोग
रतनपुर की सरस्वती पूजा की एक और खास परंपरा असमय पके कटहल का भोग है. बसंत पंचमी से शुरू होने वाली पूजा में देवी को पका हुआ कटहल अर्पित किया जाता है. गांव के लोग इन कटहलों को लेकर पूरे गांव में घूमते हैं. यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है और पूजा की पहचान बन चुकी है.दुर्गा पूजा की जगह सरस्वती पूजा का महत्व
इस गांव में दुर्गा पूजा मूर्ति बनाकर नहीं मनायी जाती है. इसी कारण सरस्वती पूजा ही यहां का मुख्य त्योहार मानी जाती है. रतनपुर गांव के दासपारा और विश्वासपारा में दो स्थानों पर यह पूजा नौ दिनों तक चलती है. आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग पूजा-अर्चना, देवी दर्शन और प्रसाद ग्रहण करने पहुंचते हैं. पूजा को लेकर गांव में मेला लगाने की तैयारी शुरू हो गयी है. सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन और रिहर्सल भी चल रही है. काम के सिलसिले में बाहर गए ग्रामीण सरस्वती पूजा के अवसर पर छुट्टी लेकर घर लौटने लगे हैं. पूरे इलाके में उत्सव, आस्था और उमंग का माहौल बना हुआ है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
