बर्न स्टैंडर्ड कंपनी की जिम्मेवारी साउथ ईस्टर्न रेलवे को मिलने की तैयारी

इस बारे में जानकारी देते हुए आद्रा मंडल रेल के सीनियर डीसीएम विकास कुमार ने बताया कि बर्न स्टैंडर्ड कंपनी को टेकओवर करने की प्रक्रिया की बातचीत चल रही थी.

रेलवे ने शुरू की प्रक्रिया

संतोष विश्वकर्मा, आसनसोल

रेल मंत्रालय के अधीन भारतीय रेलवे ने बर्न स्टैंडर्ड कंपनी लिमिटेड की जिम्मेदारी साउथ ईस्टर्न रेलवे को सौंप दी है. इसे लेकर कागजी कार्रवाई लगभग पूरी होने को है. सूत्रों के हवाले से बताया गया कि बर्न स्टैंडर्ड कंपनी की देखरेख की जिम्मेदारी साउथ ईस्टर्न रेलवे को सौंपने की प्रक्रिया चल रही है.

इस बारे में जानकारी देते हुए आद्रा मंडल रेल के सीनियर डीसीएम विकास कुमार ने बताया कि बर्न स्टैंडर्ड कंपनी को टेकओवर करने की प्रक्रिया की बातचीत चल रही थी. फिलहाल अभी तक हैंडओवर का निर्देश नहीं मिला है, क्योंकि यह दो मंडलों के बीच की प्रक्रिया है. इसलिए इसे लेकर अभी कोई नया अपडेट नहीं मिला है. उन्होंने कहा कि दक्षिण पूर्व रेलवे के अधीन आ जाने के बाद जोन अपनी जरूरत के अनुसार इसका उपयोग करेगा.

बर्न स्टैंडर्ड कंपनी की बंदी और नीति आयोग की भूमिका

आरएसपी नेता आशीष बाग ने बताया कि बर्न स्टैंडर्ड कंपनी के क्लोजर के कारण तीन हजार कार्मिकों को बेरोजगारी का सामना करना पड़ा था. उन्होंने बताया कि बर्नपुर स्थित बर्न स्टैंडर्ड कंपनी भारत भारी उद्योग लिमिटेड की एक अनुषंगी कंपनी थी, जो मालवाहक वॉगन बनाने का कार्य करती थी. बर्न स्टैंडर्ड कंपनी लिमिटेड, हावड़ा बर्न स्टैंडर्ड, दुर्गापुर, गलफाड़बाड़ी—सभी यूनिट मुनाफे में चल रही थीं. इसके बावजूद केंद्र सरकार की नीति आयोग ने जनवरी 2017 में कंपनी को दिवालिया घोषित कर बंद करने का निर्णय लिया. इसे सिक इंडस्ट्रीज की सूची में डाल दिया गया. नेशनल कॉरपोरेट लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) ने अप्रैल 2017 में सौ प्रतिशत वीआरएस (वॉलंटरी रिटायरमेंट स्कीम) के साथ कंपनी को बंद करने का निर्देश जारी कर दिया. कर्मचारियों के वीआरएस के लिए 300 करोड़ रुपये की राशि दी गयी.

वर्ष 2018 में कंपनी में 1400 अस्थायी कर्मचारी और 1400 ठेका कर्मी कार्यरत थे. बर्न स्टैंडर्ड कंपनी के कर्मचारियों को कंपल्सरी रिटायरमेंट स्कीम (सीआरएस) की जगह वीआरएस का भुगतान किया गया. वीआरएस और सीआरएस दोनों ही सेवानिवृत्ति से संबंधित योजनाएं हैं, लेकिन उनकी प्रकृति और उद्देश्य अलग हैं. वीआरएस यानी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना, कर्मचारियों को मानक सेवानिवृत्ति आयु से पहले सेवानिवृत्त होने की अनुमति देती है, अक्सर वित्तीय प्रोत्साहन के साथ. जबकि सीआरएस यानी अनिवार्य सेवानिवृत्ति योजना उन कर्मचारियों के लिए लागू होती है जो कम प्रदर्शन कर रहे हों या एक निश्चित आयु तक पहुंच चुके हों. कर्मचारियों को 36 महीने के डीए और बेसिक के भुगतान के साथ वीआरएस दिया गया.

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By GANESH MAHTO

GANESH MAHTO is a contributor at Prabhat Khabar.

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