तृणमूल कार्यकर्ताओं के घर-घर जाने के आदेश से सियासी घमासान

उन्होंने कहा कि यदि कोई मतदाता अनुपस्थित रहता है, तो तृणमूल कार्यकर्ता उसकी ओर से फॉर्म भरकर जमा करेंगे.

तृणमूल सांसद अरूप चक्रवर्ती के बयान पर विवाद बांकुड़ा. सिमलापाल प्रखंड में आयोजित तृणमूल कांग्रेस के ‘विजय सम्मेलन’ कार्यक्रम में सांसद अरूप चक्रवर्ती के एक बयान से राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है. सांसद ने कहा कि बूथों पर मौजूद तृणमूल कार्यकर्ताओं को बूथ स्तर के अधिकारियों (बीएलओ) के साथ घर-घर जाकर मतदाता सूची का कार्य करना होगा. उन्होंने कहा कि यदि कोई मतदाता अनुपस्थित रहता है, तो तृणमूल कार्यकर्ता उसकी ओर से फॉर्म भरकर जमा करेंगे. साथ ही हर गांव और मोहल्ले में नागरिक समितियां बनाने का भी आह्वान किया.

सांसद बोले-नाम हटाने पर करेंगे दिल्ली मार्च की धमकी

अरूप चक्रवर्ती ने कहा कि किसी भी नागरिक का नाम मतदाता सूची से नहीं हटना चाहिए. उन्होंने दावा किया कि यदि ऐसा होता है, तो वे अभिषेक बनर्जी से इस मामले पर बात करेंगे और आवश्यकता पड़ने पर लाखों ग्रामीणों के साथ दिल्ली कमिश्नर कार्यालय तक मार्च करेंगे. इस बयान के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या सरकारी कार्य में राजनीतिक कार्यकर्ताओं की भागीदारी चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन है. विपक्ष का आरोप है कि तृणमूल कांग्रेस प्रशासनिक प्रक्रिया में दखलंदाजी कर रही है और मतदाता सूची में हेराफेरी की कोशिश कर रही है.

भाजपा ने कहा-‘यह फर्जी मतदाता जोड़ने की साजिश’

भाजपा के पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री सुभाष सरकार ने आरोप लगाया कि बीएलओ के साथ तृणमूल कार्यकर्ताओं को भेजने का उद्देश्य मतदाता सूची में फर्जी नाम जोड़ना है. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ऐसी हेराफेरी बर्दाश्त नहीं करेगा. सुभाष सरकार ने कहा कि तृणमूल के नेता डर गए हैं, इसलिए घुसपैठियों और फर्जी मतदाताओं के नाम सूची में शामिल करने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी वैध मतदाता का नाम नहीं हटाया जाएगा, और भाजपा यह सुनिश्चित करेगी कि मतदाता सूची पूरी तरह निष्पक्ष रहे.

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By GANESH MAHTO

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