पुनर्वास को लेकर लंबे समय से चल रहा आंदोलन, लोगों के आवास के 100 मीटर के घेरे में चल रही कोयला खदान प्रतिनिधि, आसनसोल/रूपनारायणपुर. बाराबनी थाना क्षेत्र में स्थित इसीएल श्रीपुर सतग्राम एरिया के भनोड़ा वेस्ट ब्लॉक कोलियरी अंतर्गत चरणपुर ओसीपी से सटे चरनपुर हाटतला गांव में शुक्रवार रात को हुई धंसान से इलाके में तनाव का माहौल है और लोग आतंकित हैं. इस धंसान में उत्तम बाउरी का घर जमींदोज हो गया और जमीन में चारों ओर पड़े दरार से काफी घर प्रभावित हुआ है. धंसान की सूचना मिलते ही इलाके में भारी पुलिस बल की तैनाती रात से ही कर दी और सुरक्षा के मद्देनजर इलाके की घेराबंदी कर दी गयी है. सुबह से स्थानीय नेता और समाजसेवी संगठनों के प्रतिनिधियों का दौरा लगा रहा. युवा तृणमूल के जिला उपाध्यक्ष सिंटू कुमार भुइयां इस मुद्दे को लेकर श्रीपुर सतग्राम एरिया के महाप्रबंधक के साथ बैठक की, जिसमें पुनर्वास पैकेज तत्काल मुहैया कराने की मांग की गयी. महाप्रबंधक ने इसपर निर्णय के लिए कुछ समय की मांग की. श्री भुइयां ने कहा कि 70 वर्षों से अधिक समय से लोग यहां बसे हुए हैं. इन्हें यहां से हटने के लिए एक लाख रुपये का ऑफर किया जा रहा है. इतने पैसे से अधिकारियों के घर के बाथरूम का एक कोना तक नहीं बनता और लोगों को इस पैसे से दूसरी जगह घर बनाने को कहा जा रहा है. जबकि इसीएल में ही पुनर्वास के नाम पर लोगों को घर बनाकर दिया गया, जहां घर नहीं बना सके, वहां पांच लाख रुपये तक का पैकेज दिया गया. जबतक उचित मुआवजा नहीं मिलता, लोग आंदोलन करते रहेंगे. लोगों ने ओसीपी में कोयला खनन का कार्य बंद करा दिया है. गौरतलब है कि चरणपुर हाटतला इलाके के सैकड़ों परिवार खदान के आसपास बसे हुए हैं. इनके पास जमीन का कोई वैध कागजता नहीं है, इनका कहना है कि जब इसीएल नहीं था उससे पहले से वे यहां रहते हैं. कोल कम्पनी की जमीन पर उन्हें बसाया गया था. खदान की विस्तारीकरण के बाद से ही इनलोगों के आवासों के लिए खतरा उत्पन्न हो गया. इसीएल प्रबंधन इनलोगों को अनेकों बार यहां से हटाने का प्रयास किया लेकिन नाकाम रहा. ये लोग पुनर्वास की मांग पर अड़े हैं. अनेकों बार खदान में कार्य बंद करके आंदोलन किया. स्थानीय दो पक्षों में जमकर मारपीट भी हुई और दर्जनों लोग घायल भी हुए थे. केस मुकदमा भी हुआ. थाना घेराव से शुरू कर सड़कों पर रैली निकाली गयी. इसके बाद भी अबतक स्थिति जहां थी वहीं है. इस परिस्थिति में इनलोगों का यहां रहना खतरे से खाली नहीं है. धंसान के कारण चारों ओर बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गयी है. पुनः धंसान होने का खतरा बना हुआ है. लोग आतंकित हैं. पुलिस की अधिकारियों पर ही लोग अपनी भड़ास निकाल रहे थे. इसीएल प्रबंधन के अनुसार जिन लोगों का घर क्षतिग्रस्त हुआ है, पुनर्वास पैकेज पर फैसला नहीं होने तक उन्हें अस्थायी रूप से इसीएल के आवासों में रहने को कहा जा रहा है. लेकिन कोई वहां से हटने को तैयार नहीं है.
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