पक्षियों और छोटे वन्यजीवों के लिए वन विभाग की पहल

वन्यजीव संरक्षण के लिए बनाये जा रहे कृत्रिम घोंसले, जिले के अन्य इलाकों में भी लागू हो सकता है यह मॉडल

प्रणव कुमार बैरागी, बांकुड़ा

वन विभाग ने बांकुड़ा जिले के गंगाजलघाटी में पक्षियों और छोटे वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए एक सराहनीय पहल की है. वनों की कटाई और सिकुड़ने से पक्षी, गिलहरी और अन्य छोटे जानवर अपने प्राकृतिक आवास खो रहे हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए गंगाजलघाटी वन रेंज कार्यालय ने इनके लिए वैकल्पिक आवास तैयार करने का कार्य शुरू किया है.

प्राकृतिक सामग्रियों से तैयार घोंसले

रेंज कार्यालय के अनुसार मिट्टी के बर्तनों और लकड़ी के बक्सों जैसी प्राकृतिक सामग्रियों से सौ से अधिक घोंसले बनाये जा रहे हैं. इन्हें पेड़ों की शाखाओं पर लटकाया जा रहा है ताकि पक्षी सुरक्षित रूप से अंडे दे सकें और मौसम से बच सकें. शुरुआत में यह परियोजना लगभग 60 हेक्टेयर वन भूमि पर लागू की गयी है.

स्थानीय स्तर पर बढ़ रही जागरूकता

रेंज ऑफिसर आलमगीर हक ने बताया कि प्राकृतिक सामग्रियों का उपयोग कर सुरक्षित आवास तैयार किये जा रहे हैं और कई जगहों पर पक्षियों का आना-जाना शुरू हो गया है. उनकी टीम नियमित निगरानी कर रही है और उम्मीद है कि यह पहल पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभायेगी. उत्तरी बांकुड़ा डिवीजन के डीएफओ शेख जे फरीद ने कहा कि स्थानीय वन सुरक्षा समितियों के सहयोग से यह कदम उठाया गया है और सफल रहने पर इसे अन्य इलाकों में भी लागू किया जायेगा.

पारिस्थितिकी संतुलन की दिशा में कदम

पर्यावरणविद् दिव्येंदु गोस्वामी और नवनीता पांडा ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह परियोजना पक्षियों के पुनर्वास के साथ पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण की दिशा में एक व्यावहारिक कदम है. इससे पक्षियों की संख्या बढ़ेगी और जैव विविधता को मजबूती मिलेगी. इस प्रयास ने उन इलाकों में नयी उम्मीद जगायी है, जहां पक्षियों की चहचहाहट धीरे-धीरे गायब हो रही थी.

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By GANESH MAHTO

GANESH MAHTO is a contributor at Prabhat Khabar.

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