शिक्षा का अधिकार कानून- 2009 का हो रहा उल्लंघन, जिला शिक्षा विभाग के पास डेटा नहीं

शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम 2009 का पश्चिम बर्दवान जिला में घोर उल्लंघन हो रहा है.

आसनसोल.

शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम 2009 का पश्चिम बर्दवान जिला में घोर उल्लंघन हो रहा है. इसी आरोप के मद्देनजर बाराबनी थाना क्षेत्र इलाके के निवासी व सोशल एक्टिविस्ट बिट्टू विश्वकर्मा ने गरीब बच्चों के निजी स्कूलों में नि:शुल्क दाखिला को लेकर आवाज उठायी, इसके बाद जो सच उभर कर सामने आया, उसे जान कर उनके होश फाख्ता हो गये. सूचना का अधिकार कानून-2005 के तहत जिला शिक्षा विभाग से उन्होंने इस मुद्दे पर पांच सवाल पूछे. जिला शिक्षा अधिकारी, सर्व शिक्षा मिशन ने इसके जवाब में कहा कि ऑफिस के पास इन सवालों से जुड़े कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है. श्री विश्वकर्मा ने कहा इससे इस बात का पता चलता है कि आरटीई अधिनियम को लेकर जिला प्रशासन कितना सजग है. इसके चलते ही इसका घोर उल्लंघन हो रहा है. इसे लेकर कानूनी लड़ाई की जायेगी.

जिला शिक्षा अधिकारी ने पांच सवालों के जवाब में जो उत्तर दिया

जिला शिक्षा अधिकारी ने आरटीआई के दायरे में पूछे गये बिट्टू शर्मा के पांच सवालों के जवाब में पहले सवाल के जवाब में जिला में 163 स्कूलों की सूची भेजी, जो आरटीई के दायरे में है. अन्य चार सवालों के जवाब में कहा कि ऑफिस के पास कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है.

जिला शिक्षा विभाग से किये पांच सवाल

सवाल – 1

जिला में कितने गैर-अनुदान प्राप्त व गैर सरकारी स्कूल आरटीई के दायरे में हैं ?

सवाल – 2

वर्ष 2023-24 और 2024-25 शिक्षा सत्र किस स्कूल के कितना सीट था और आरटीई के कोटे में कितने बच्चों का दाखिला हुआ व कितना सीट खाली रहा?

सवाल – 3

पिछले दो शिक्षा सत्र में आरटीई के तहत जिला शिक्षा विभाग को सरकार से कितना फंड मिला? कितना फंड स्कूलों को जारी किया गया और कितना बचा हुआ है?

सवाल -4

आरटीई के लिए जिला में जिम्मेदार अधिकारी कौन है? जिसका नाम, पद और फोन नम्बर चाहिए.

सवाल – 5

पिछले दो शिक्षा सत्र में आरटीई के नियमों के उल्लंघन को लेकर कितने स्कूलों पर जांच हुई और कुछ कार्रवाई हुई या नहीं.

आरटीई कानून-2009 के दायरे में क्या हैं प्रावधान

एक- मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा

छह से 14 वर्ष के बच्चों के लिए लागू

प्रारंभिक शिक्षा (एक-आठ कक्षा) पूरी होने तक कोई ट्यूशन फीस नहीं लिया जा सकता

सरकार और अभिभावकों की जिम्मेदारी है कि बच्चे स्कूल जाएं

दो-निजी स्कूलों में आरक्षण

सभी गैर-अनुदान प्राप्त व गैर सरकारी स्कूलों को अपनी प्रारंभिक कक्षाओं में 25 फीसदी सीटें आर्थिक रूप से कमजोर और असुविधाग्रस्त परिवार के बच्चों के लिए आरक्षित करनी होगी.

बच्चों को अपने आस-पास के स्कूलों में शिक्षा पाने का अधिकार है.

प्रवेश के लिए किसी स्क्रीनिंग टेस्ट या इंटरव्यू की मनाही है.

इसके अलावा भी आरटीई में अनेकों नियम है, सामाजिक कार्यकर्ता श्री विश्वकर्मा ने निजी स्कूलों में 25 फीसदी आरक्षण को लेकर मुहिम शुरू की है.

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By AMIT KUMAR

AMIT KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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