बोलपुर.
”विश्व धरोहर” विश्वभारती में रवींद्र संगीत, वैदिक मंत्रोच्चार, पूजा-अर्चना के माध्यम से शनिवार को रवींद्र जयंती उत्सव मनाया गया. सुबह वैतालिक, उसके बाद रवींद्र भवन में कबी कविकंठ, माधव बितान में जन्मोत्सव मनाया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति (वीसी) प्रबीर कुमार घोष ने की. विश्वभारती के ”विरासत” घोषित होने के बाद से इस महोत्सव को नया आयाम मिला है. कुलपति ने कहा, गुरुदेव जयंती पर तय परंपरा के अनुरूप दिनभर विभिन्न कार्यक्रम हुए. गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर के जीवनकाल से ही आश्रम के छात्र छात्राएं शांतिनिकेतन में कवि का जन्मदिन मनाते है. रंगामाटी के इस जिले में भीषण गर्मी के कारण, आश्रम में पानी की समस्या के कारण, गुरुदेव के निर्णय के अनुसार, कवि का जन्मदिन 1936 से 25वें बैसाख के बजाय बांग्ला नववर्ष के दिन मनाया जाने लगा. यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है.फिलहाल आश्रम संकट में है. इस समय गर्मी अपेक्षाकृत कम होती है, इन्हीं सब कारणों से एक दशक से विश्वभारती में हर 25वें बैसाख को रवींद्र जन्मोत्सव मनाया जाता है. संयोगवश, कविगुरु रवीन्द्रनाथ टैगोर का जन्म 7 मई, 1861 (25 बैसाख, 1268 बंगाब्द) को कोलकाता के जोड़ासांको में हुआ था. हालांकि, कवि का अधिकांश जीवन ”प्राण आराम” शांतिनिकेतन में बीता.
इस दिन गौर प्रांगण में सुबह 5:00 बजे वैतालिक के साथ रवींद्र जन्मोत्सव समारोह शुरू हुआ. बाद में, 5:30 बजे रवींद्र भवन में कविकांत, 7 बजे पारंपरिक पूजा घर में ब्रह्मापूजा, वैदिक मंत्रपाठ, सुबह 9:00 बजे माधव बितान में रवींद्र जयंती मनायी गयी. विश्वभारती के वीसी प्रबीर कुमार घोष ने रवींद्र भवन में कवि के इस्तेमाल की कुर्सी पर श्रद्धांजलि अर्पित की. कार्यवाहक जनसंपर्क अधिकारी अतिग घोष सहित प्रोफेसर, अधिकारी, आश्रमिक एवं विद्यार्थी उपस्थित थे.