दुर्गापुर में डियर लॉटरी की आड़ में सट्टेबाजी का फैला है जाल

निष्क्रियता. प्रशासन की उदासीनता से सटोरियों का बढ़ा मनोबल

शहर के कई इलाकों में खुलेआम चल रहा जुए का कारोबार

दुर्गापुर. शहर में इन दिनों डियर लॉटरी की आड़ में खुलेआम सट्टा बाजी और जुआ का खेल चल रहा है. स्टील टाउनशिप के चंडीदास सब्जी बाजार, चंडीदास बकुल तला, ट्रंक रोड, पांच माथा मोड़ और आशीष मार्केट जैसे कई स्थान इस अवैध कारोबार के अड्डे बन गए हैं. स्थानीय लोगों ने कई बार पुलिस को इसकी शिकायत दी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. नतीजतन सट्टेबाजों का मनोबल बढ़ता जा रहा है और इस चक्कर में बच्चे व युवा पीढ़ी बर्बाद हो रही है.

ऐसे खेला जाता है सट्टे का खेल

सूत्रों की मानें, तो यह खेल ‘डियर लॉटरी’ के नाम पर मोबाइल फोन से संचालित किया जाता है. लॉटरी के दस अंकों वाले नंबर के अंतिम दो अंकों पर सट्टा लगाया जाता है. यदि कोई व्यक्ति दस रुपये लगाता है और उसका नंबर मैच कर जाता है, तो उसे सौ रुपये मिलते हैं. जबकि दो नंबर पर बीस रुपये लगाने पर दो हजार रुपये तक की जीत होती है. सट्टेबाज टेबल पर डियर लॉटरी के टिकट सजाते हैं और नीचे सफेद कागज पर खिलाड़ियों के कोड नाम और नंबर लिखे जाते हैं. इसके बाद मोबाइल के जरिये परिणाम तय किए जाते हैं. यह खेल दिन में चार बार खेला जाता है, जिससे लोग अधिक कमाई के लालच में अपनी मेहनत की कमाई गंवा देते हैं.

काला धन और राजस्व घाटे का गोरखधंधा

सूत्रों के दावे पर यकीन करें, तो यह कारोबार काले धन को सफेद करने का जरिया बन गया है. विभिन्न एजेंटों के माध्यम से सट्टेबाजी का यह नेटवर्क संचालित किया जा रहा है, जिसे रोकना प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है. दुर्गापुर के संजय नामक व्यक्ति का नाम इस धंधे में प्रमुख रूप से सामने आया है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है.डियर लॉटरी राज्य सरकार को 40 प्रतिशत टैक्स का भुगतान कर वैध रूप से संचालित होती है, लेकिन अवैध सट्टेबाजी के फैलाव से लॉटरी टिकटों की बिक्री घट गई है, जिससे सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है. इस बारे में दुर्गापुर थाना प्रभारी ने कहा कि सट्टेबाजी से संबंधित शिकायत मिलने पर समय-समय पर कार्रवाई की जाती है.

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By GANESH MAHTO

GANESH MAHTO is a contributor at Prabhat Khabar.

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