बांकुड़ा में आशाकर्मियों को कोलकाता जाने से रोके जाने पर खूब हुआ बवाल

पुलिस प्रशासन ने आशा कर्मियों को कोलकाता जाने से रोके जाने के बाद बांकुड़ा जिले के कोने-कोने में विरोध प्रदर्शन तेज हो गया.

बांकुड़ा.

पुलिस प्रशासन ने आशा कर्मियों को कोलकाता जाने से रोके जाने के बाद बांकुड़ा जिले के कोने-कोने में विरोध प्रदर्शन तेज हो गया. सड़क जाम और धरना प्रदर्शन के जरिए आशा कर्मियों ने पुलिस के रवैये के खिलाफ आक्रोश जताया.

खातड़ा, बड़ाबरजोड़ा सहित कई इलाकों में सड़क जाम

खातड़ा के पंप मोड़ पर आशा कर्मियों की बस रोके जाने के बाद सड़क जाम किया गया. बड़ाबरजोड़ा में भी आशा कर्मियों को सड़क जाम करने पर मजबूर होना पड़ा. बांकुड़ा रेलवे स्टेशन से लेकर बेलियातोड़, हीरबांध, पात्रसायर, तालडांगरा, सिमलापाल और कोतूलपुर समेत कई स्थानों पर पुलिस प्रशासन पर धमकाकर आशा कर्मियों को रोके जाने के आरोप लगे.

बसें जब्त करने व धमकी देने के आरोप

पश्चिम बंगाल आशा कर्मी यूनियन की अध्यक्ष लीना घोष ने कहा कि पहले से तय निर्णय के अनुसार 21 जनवरी 2026 को हेल्थ सेक्रेटरी नारायण स्वरूप निगम के साथ बैठक निर्धारित थी. उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने लगभग हर ब्लॉक में रिजर्व बसों को जब्त कर लिया है और कुछ स्थानों पर बसों को थाने ले जाया गया. ब्लॉक नेताओं को घर-घर जाकर और फोन पर धमकाने के आरोप भी लगाए गए हैं. कुछ जगहों पर तृणमूल नेताओं की ओर से धमकी देने की बात कही गयी है. लीना घोष के अनुसार, तालडांगरा से बस को पुलिस स्टेशन ले जाया गया, सिमलापाल से आयी बस को बीच सड़क पर जब्त किया गया और कोतूलपुर, इंदास व पात्रसायर से आई बसों को आगे नहीं बढ़ने दिया गया. कुछ बसों में तोड़फोड़ की धमकी देने के आरोप भी लगाये गये हैं.

आंदोलन जारी रखने का ऐलान

आशा कर्मी यूनियन ने स्पष्ट किया कि इन घटनाओं से आंदोलन नहीं रुकेगा. संगठन का कहना है कि उनकी मांगें जायज हैं और किसी भी तरह कोलकाता पहुंचकर कार्यक्रम को सफल किया जायेगा.

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By AMIT KUMAR

AMIT KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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