जामुड़िया में औद्योगिक प्रदूषण से हालात बिगड़े, एक्यूआइ 254 तक पहुंचा

जामुड़िया औद्योगिक क्षेत्र में कारखानों से निकलने वाले धुएं और धूल ने स्थानीय निवासियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं.

जामुड़िया.

जामुड़िया औद्योगिक क्षेत्र में कारखानों से निकलने वाले धुएं और धूल ने स्थानीय निवासियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. औद्योगिक विकास की आड़ में पर्यावरण नियमों की अनदेखी का आरोप लग रहा है, जिससे आसपास के कई गांवों में स्वास्थ्य संकट गहराता जा रहा है. क्षेत्र का वायु गुणवत्ता सूचकांक 254 तक पहुंच गया है, जिसे मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत खतरनाक माना जा रहा है.

नियमों की अनदेखी का आरोप

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देशों के अनुसार स्पंज आयरन कारखानों में प्रदूषण नियंत्रण के लिए ईएसपी मशीन लगाना अनिवार्य है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि अधिकांश कारखाने इन नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की ढिलाई के कारण कारखानों का विस्तार तो हो रहा है, लेकिन प्रदूषण रोकने के उपाय नहीं किये जा रहे हैं.

इन गांवों पर सबसे ज्यादा असर

इकड़ा, महिशाबुड़ी, सार्थकपुर, हुरमाडागा, राजारामडागा, दामोदरपुर, धसल, विजयनगर, हिजलगोड़ा, शेखपुर, जादुडागा, चंडीपुर और बहादुरपुर जैसे गांव प्रदूषण की चपेट में हैं. स्थानीय निवासी बुद्धदेव रजक ने कहा कि कभी घने जंगलों वाले इलाकों में अब इमारतें खड़ी कर दी गई हैं और ग्रीन जोन के नाम पर केवल औपचारिकता निभायी जा रही है.

वायु के साथ जल प्रदूषण भी गंभीर

कारखानों से निकलने वाले रसायनयुक्त पानी से नदियां विषाक्त हो रही हैं. सांस की दिक्कत, त्वचा रोग और आंखों में जलन जैसी समस्याएं आम हो गई हैं. भारी वाहनों से उड़ने वाली धूल के कारण सड़क दुर्घटनाओं की घटनाएं भी बढ़ रही हैं.

राजनीतिक बयानबाजी तेज

भाजपा उपाध्यक्ष संतोष सिंह ने कहा कि आसनसोल नगर निगम को इस क्षेत्र से भारी टैक्स मिलता है, लेकिन प्रदूषण रोकने के लिए सख्ती नहीं हो रही है. उन्होंने चेतावनी दी कि कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन किया जायेगा. चेंबर ऑफ कॉमर्स ने जतायी चिंता जामुड़िया चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के सचिव महेश सावड़िया ने कहा कि उद्योगों से रोजगार जरूरी है, लेकिन प्रदूषण इस स्तर तक नहीं होना चाहिए. उन्होंने बताया कि नियम तोड़ने वाले कारखानों के खिलाफ उच्च अधिकारियों को लिखित शिकायत दी जायेगी. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रदूषण नियंत्रण विभाग और प्रशासन ने तुरंत कदम नहीं उठाये, तो जामुड़िया आने वाले समय में रहने लायक नहीं बचेगा.

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Author: AMIT KUMAR

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