सीएमओएच के खिलाफ मुख्यमंत्री से टीएमसी कर्मचारी यूनियन ने की शिकायत

जीएनएम नर्सों की कमी से अस्पताल प्रबंधन परेशान रानीगंज : जिला के मुख्य स्वास्थ्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओएच) द्वारा मारवाड़ी रिलीफ सोसाइटी अस्पताल को बंद करने के नोटिस के खिलाफ अस्पताल से जुड़े तृणमूल कांग्रेस कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष गोपाल आचार्या ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा. उन्होंने सीएमओएच के इस निर्णय के खिलाफ उनपर कार्रवाई करने […]

जीएनएम नर्सों की कमी से अस्पताल प्रबंधन परेशान

रानीगंज : जिला के मुख्य स्वास्थ्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओएच) द्वारा मारवाड़ी रिलीफ सोसाइटी अस्पताल को बंद करने के नोटिस के खिलाफ अस्पताल से जुड़े तृणमूल कांग्रेस कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष गोपाल आचार्या ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा. उन्होंने सीएमओएच के इस निर्णय के खिलाफ उनपर कार्रवाई करने की मांग करते हुए इस निर्णय को रद्द करने की अपील की है.
इसकी प्रति उन्होंने राज्य के मुख्य सचिव, मंत्री मलय घटक को भी भेजी है. श्री आचार्या ने कहा कि यह गैरजिम्मेदाराना निर्णय है. एक रनिंग अस्पताल को इस तरह बंद नहीं किया जा सकता है. मारवाड़ी रिलीफ सोसाइटी अस्पताल में गरीबों का इलाज किया जाता है. इससे हजारों मरीज प्रभावित होंगे.
सनद रहे कि सीएमओएच देवाशीष हलदर ने रानीगंज इलाके में पांच निजी अस्पतालों को बंद करने का निर्देश जारी किया है. उन्होंने क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट (सीई) एक्ट 2017 के नियमों के उल्लंघन का हवाला देकर सीई का लाइसेंस रिजेक्ट करते हुए अस्पतालों को तत्काल बन्द करने को कहा है.
जब-तक नियमों का पालन करने की पूरी व्यवस्था नहीं होती है, तब-तक के लिये अस्पतालों सीई रिन्यूवल नहीं होने की बात कही है. उनके इस निर्देश से अस्पतालों में हड़कंप मच गया है. इसके पूर्व रानीगंज आई अस्पताल परिसर में चलने वाली त्रिविना, सियारसोल में स्थित पीएन मालिया अस्पताल, राम बागान में स्थित केएम अस्पताल तथा रानीगंज के सबसे प्रसिद्ध आनंदलोक अस्पताल को नोटिस जारी किया गया था. अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि जीएनएम नर्स की काफी कमी है
.अगर नर्स मिलती भी है तो उनका वेतन इतना अधिक है कि अस्पताल प्रबंधन उन्हें वेतन में रखकर अस्पताल को नहीं चला पाएंगे. रानीगंज मारवाड़ी रिलीफ सोसायटी अस्पताल के संयुक्त सचिव राजेंद्र प्रसाद खेतान ने बताया कि उनके अस्पताल में कुल 90 बेड है. इन 90 बेड के लिए 18 जीएनएम नर्स कार्यरत है. सरकारी नियम के अनुसार 54 नर्स होनी चाहिए. जीएनएम नर्स का मिल पाना काफी मुश्किल हो रहा है.
मारवाड़ी रिलीफ सोसायटी अस्पताल चैरिटेबल अस्पताल है. गरीबों का यहां दिन रात इलाज होता है. ऐसी स्थिति में बिना पूर्व सूचना
के अस्पताल को बंद कर देना कहां तक उचित है? अस्पताल प्रबंधन सीएमओएच से बातचीत कर इस समस्या का समाधान करने का प्रयास कर रहा है.
ट्रवीणा के मालिक विकास खेमका ने बताया कि उनके अस्पताल में 40 बेड पर 12 जीएनएम नर्स कार्यरत है. सीएमओएच द्वारा अस्पताल बंद करने का नोटिस मिला है. इसका जवाब प्रबंधन द्वारा दिया जायेगा. पीएन मालिया अस्पताल के प्रबंधक दयामय पाल ने बताया कि उनके अस्पताल में 29 बेड है. सीएमओएच का यह निर्देश है कि बेड की संख्या कम करें या नर्सों की संख्या बढ़ाए.
अस्पताल प्रबंधन ने 29 बेड की जगह 15 बेड कर दिया है. आठ जीएनएम नर्स कार्यरत है. केएम अस्पताल के प्रबंधक कुशल पांडे ने बताया कि मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा नोटिस मिलने के पश्चात अस्पताल प्रबंधन ने 30 बेड के जगह 10 बेड कर दिया है. फिलहाल चार जीएनएम नर्स कार्यरत है.
आनंद लोक अस्पताल के मालिक देव कुमार सर्राफ ने बताया कि रानीगंज आनंदलोक अस्पताल में 134 बेड है. जिसमें 22 जीएनएम नर्स कार्यरत है. जीएनएम नर्स की नियुक्ति का प्रयास किया जा रहा है. जीएनएम नर्स का मिल पाना मुश्किल हो रहा है. श्री सर्राफ ने बताया कि पूरे पश्चिम बंगाल में आनंदलोक ही एकमात्र अस्पताल है. जहां 85 हजार में बाईपास सर्जरी तथा 18 हजार रुपयों में गॉलब्लैडर का ऑपरेशन किया जाता है. इसके बावजूद भी सरकार का इस तरह का रवैया अपनाना कहां तक उचित है? इसका सर्वस्तर पर विरोध होना चाहिए.

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