दुर्गापुर : अंतरराष्ट्रीय मातृ दिवस हर साल मई के दूसरे रविवार को मनाया जाता है. दुनिया में केवल एक मां ही हैं जो हमेशा अपने बच्चों के दुख और खुशी के बारे में सबसे पहले जान पाती हैं. सभी की जिंदगी में वही एक ऐसी महिला व शख्स हैं जो बिना शर्त के अपने बच्चों के लिए सब कुछ करती हैं.
वह हमारी भावनाओं को बहुत अच्छी तरह समझती हैं। इस दिन को लेकर शिल्पांचाल के बेटियो मे खासा उत्साह दिखा.
उन्होंने मां को लेकर अपनी विचार व्यक्त किए हैं. ओबीसी में सहायक प्रबंधक स्मृति शर्मा का कहना है की ‘मां’ इस शब्द पर कोई चाहे तो महाकाव्य लिख सकता है और चाहे तो एक शब्द में ही पूरी सृष्टि समाहित है. जैसे कि एक छोटा सा बीज भी पेड़ मां ही है. कवि मनोज मुंतशिर ने मां के लिए कहा है "देखते ही देखते उसके सामने कोई और परवर दिगार हो गया, मां को बना कर खुदा बेरोज़गार हो गया".
मैं अपनी मां से आज मातृ दिवस पर कहना चाहती हूं कि जैसे आप हमेशा हर अच्छे और बुरे समय में एक उम्मीद की किरण सी मेरे साथ रही हैं मैं भी आपकी परछाई की तरह हमेशा आपके पीछे पीछे चलूंगी. ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स मं लिपिक वंदना ने कहा कि हर दिन सोचती हूं, हर पल उसकी बहुत याद आती है, वो ममता की देवी, साक्षात जो जग में मां कहलाती है.
हमें अपनी मां की इज्जत करनी चाहिए. गृहणी सरोज अग्रवाल और टुंपा दत्ता ने कहा की मां रूपी शब्द के उच्चारण मात्र से ही सारे कष्ट दूर हो जाते हैं. मां का प्यार भरा स्पर्श सारे दुःख दर्द को दूर कर देता है.
मां का प्रेम बच्चों के लिए अमृत के सामान होता हैं. बैंक अधिकारी कृति गुप्ता ने कहा कि सभी की मां उनके लिए बहुत खास होती है. वैसी ही मेरी मां भी मेरी लिए खास है. रंजिता कुमारी का कहना ही कि मां वह है जो हमरी आंखो के आंसू चुनती है.
बिन कहे सब कुछ समझ जाती है. हमरी गलतियों को माफ कर हमें हर वक्त गले लगाती है. आकांक्षा मित्तल का कहना है की मेरी मां गृहणी के साथ साथ एक सफल टीचर भी है, वह मेरी बेस्ट फ्रेंड है. जब भी मै हारी हुई या टूटी हुई महसूस करती हूं तब मेरी माँ ही मुझे ताकत देती है.
