पानागढ़ : जिले के मन्तेश्वर सुतरा फेरी घाट से दो नाव पर मचान डालकर फेरीघाट से भारी संख्या में छात्र-छात्राएं एवं ग्रामीण जान जोखिम में डालकर आना-आना करते हैं. ऐसा नहीं है कि प्रशासन इससे अनभिज्ञ है लेकिन उसकी चुप्पी ग्रामीणों के समझ के परे हैं. प्रशासन की उदासीनता से ग्रामीणों में आक्रोश है. उल्लेखनीय है कि हाल ही में मंतेश्वर तथा मेमारी के मध्य बांका नदी में यात्रियों से भरी एक नाव पलट गयी थी.
स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रतिवर्ष 50 हजार से अधिक राजस्व जिला परिषद वसूल करता है लेकिन फेरी घाट का विकास नहीं किया जा रहा है. ना तो फेरी घाट पर लाइट और पेयजल की व्यवस्था है और न ही अन्य विकास कार्य किये गये हैं. बताया जाता है कि कुसुमग्राम, पूर्वस्थली एक ब्लॉक के मध्य फेरी घाट से यात्री आना-जाना करते हैं.
इतना ही नहीं नवदीप धाम रेल स्टेशन जाने के लिए भी इसी सुतरा फेरी घाट से होकर यात्री तथा ग्रामीण व छात्र-छात्राओं को आना-जाना करना पड़ता है. फेरी घाट के माझी पलाश घोष का अभियोग है कि 17 लाइफ जैकेट ही मौजूद हैं इनमे सात पुराने तथा 10 नये लाइफ जैकेट हैं लेकिन यात्रियों की संख्या ज्यादा होने के कारण महज इतेन लाइफ जैकेट पर्याप्त नहीं है.
फेरीघाट के मालिक आलोक कुमार घोष का कहना है कि उन्होंने जिला परिषद से एक वर्ष के लिये फेरीघाट लीज पर लिया है. उन्होंने कहा कि उपयुक्त मूलभूत सुविधा नहीं होने के कारण यात्रियों तथा छात्र-छात्राओं को जान जोखिम में डालकर फेरी घाट से आना-जाना करना पड़ता है. इस दिशा में कई बार स्थानीय निवासियों ने आवाज उठायी लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. खासकर बरसात में ही उक्त दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है. नदी का जलस्तर बढ़ जाता है. प्रवाह तेज हो जाता है.
