भाजपा नेता चंदन मित्रा और कांग्रेस के चार विधायक तृणमूल कांग्रेस में शामिल

कोलकाता : भाजपा के पूर्व सांसद चंदन मित्रा, माकपा के पूर्व सांसद और केंद्रीय कमेटी के सदस्य मोइनुल हसन और कांग्रेस के चार विधायक सबीना यासमीन, अबु ताहेर, समर मुखर्जी व अखरुज्जमा शनिवार को तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गये. ये सभी धर्मतल्ला में तृणमूल कांग्रेस के शहीद दिवस कार्यक्रम में मौजूद रहे. गौरतलब है […]

कोलकाता : भाजपा के पूर्व सांसद चंदन मित्रा, माकपा के पूर्व सांसद और केंद्रीय कमेटी के सदस्य मोइनुल हसन और कांग्रेस के चार विधायक सबीना यासमीन, अबु ताहेर, समर मुखर्जी व अखरुज्जमा शनिवार को तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गये. ये सभी धर्मतल्ला में तृणमूल कांग्रेस के शहीद दिवस कार्यक्रम में मौजूद रहे. गौरतलब है कि कुछ दिन पूर्व चंदन मित्रा ने भाजपा से इस्तीफा दे दिया था. वह भाजपा की ओर से दो बार राज्यसभा सदस्य रहे. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मौजूदगी में तृणमूल कांग्रेस में भाजपा के चुनाव चिन्ह पर पंचायत चुनाव जीतने वाले 56 अन्य लोग भी शामिल हुए.
हर साल 21 जुलाई के शहीद दिवस की सभा में तृणमूल कांग्रेस विरोधी दलों के नेताओं को तोड़कर मंच पर लाती रही है. इस बार भी उसी परिपाटी को दोहराया गया. कुछ दिन पहले भाजपा नेता और तृणमूल कांग्रेस में कभी नंबर दो की हैसियत रखने वाले मुकुल राय ने राज्य चुनाव आयोग के पास जा कर फरियाद की थी कि उनकी पार्टी के विजेता उम्मीदवारों की सुरक्षा सुनिश्चित किया जाये. क्योंकि पुलिस व तृणमूल कांग्रेस के लोग उन पर अत्याचार करके तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने का दबाव बना रहे हैं. भाजपा के 56 लोगों के तृणमूल में शामिल होने की घटना उनकी आशंका को सही साबित कर दी. उधर, 17 जुलाई को चंदन मित्रा ने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को अपना इस्तीफा सौंप दिया था. चंदन मित्रा की गिनती भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के करीबियों में होती रही है. साल 2003 से 2009 तक वह राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत सांसद थे. बाद में मध्यप्रदेश से भाजपा ने उनको राज्य सभा में भेजा.
उधर, मोइनुल हसन ने एसएफआइ के जरिये राजनीति में प्रवेश किया. सात जुलाई को उन्होंने माकपा में अपने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया. माकपा से निष्कासित सांसद ऋतब्रत बंदोपाध्याय भी 21 जुलाई की सभा में मौजूद रहे.
तृणमूल कर रही है अन्य दलों का अवैध शिकार
राज्य में अवैध शिकार, ‘पोचिंग’ चल रहा है. जो भी विधायक तृणमूल में जा रहे हैं, उनका प्रतीक चिह्न अब भी कांग्रेस का ही है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आनेवाले नेताओं को यह कभी नहीं कहतीं कि वह कांग्रेस का प्रतीक चिह्न छोड़कर तृणमूल में शामिल हों. यह और कुछ नहीं बस राज्य में अवैध शिकार का सिलसिला चल रहा है.
अधीर रंजन चौधरी, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष
भाजपा से भयभीत हो गयी हैं ममता
दरअसल ममता बनर्जी को भाजपा मेनिया हो गया है. वह पश्चिम बंगाल में भाजपा की बढ़ती ताकत को देखकर घबरा गयी हैं. यही वजह है कि वह अब कांग्रेस माकपा को भूल कर केवल भाजपा पर निशाना साध रही हैं. पहले वह बंगाल तो संभालें, तब दिल्ली का सपना देखें.

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