आसाराम के बेटे ने कोलकाता के व्यवसायी से की ठगी

कोलकाता: आसाराम बापू और उनके बेटे नारायण साईं के अपराधों के शिकार केवल राजस्थान और गुजरात में ही नहीं है, बल्कि कोलकाता में भी एक ऐसा परिवार है, जिसे नारायण साईं ने अपने गुर्गे के साथ मिल कर न केवल करोड़ों का चूना लगाया है, बल्कि शिकायत करने पर उन्हें जान से मारने की कोशिश […]

कोलकाता: आसाराम बापू और उनके बेटे नारायण साईं के अपराधों के शिकार केवल राजस्थान और गुजरात में ही नहीं है, बल्कि कोलकाता में भी एक ऐसा परिवार है, जिसे नारायण साईं ने अपने गुर्गे के साथ मिल कर न केवल करोड़ों का चूना लगाया है, बल्कि शिकायत करने पर उन्हें जान से मारने की कोशिश भी की गयी. इंटाली इलाके के 70 बी, आनंद पालित रोड निवासी सचदेव परिवार वर्षो से आसाराम का भक्त है.

पूनम व्रतधारी हैं व्यवसायी सचदेव की पत्नी
परिवार के मुखिया पेशे से व्यवसायी सतीश सचदेव (67) की पत्नी अंजना उर्फ अंजु सचदेव कोलकाता की पहली महिला पूनम व्रतधारी हैं. श्री सचदेव एवं उनके भाई की वृंदा क्रिएशन प्राइवेट लिमिटेड नामक एक कंपनी है. पूनम व्रतधारी उसे कहा जाता है, जो पूनम के अवसर पर गुरु का चेहरा देखने के बाद ही पानी या खाने का सेवन करता है. श्री सचदेव के अनुसार उनकी पत्नी 15 वर्ष से पूनम व्रतधारी हैं और प्रत्येक पूनम के अवसर पर आसाराम का चेहरा देख कर व्रत तोड़ने के लिए वह देश के विभिन्न शहरों का चक्कर लगाती थीं. उनके बेटे तेजस्वी सचदेव ने भी लगातार ग्यारह महीने यह व्रत रखा था. आसाराम एवं नारायण साई के प्रति इस परिवार की अगाध आस्था थी. श्री सचदेव ने बताया कि अप्रैल 2008 में हरियाणा के गुड़गांव के आश्रम में नारायण साई ने बागुईहाटी निवासी आलोक मवनडिया नामक एक व्यक्ति से उनकी मुलाकात करवायी और कहा कि आलोक बेहद ईमानदार एवं सच्च इंसान है. वे लोग उसके ऊपर भरोसा कर सकते हैं. नारायण ने सचदेव परिवार को यह भी आश्वासन दिया कि आलोक उनकी सभी परेशानियों को दूर कर देगा. कंस्ट्रक्शन का व्यवसाय करनेवाले आलोक का सीआर एवेन्यू में दफ्तर था.

नारायण साईं की बातों पर एतबार करते हुए श्री सचदेव ने अपने काफी कागजात आलोक के हवाले कर दिये, जिसमें बैंक का कई हस्ताक्षरयुक्त चेक भी था. लगभग दो महीने के बाद श्री सचदेव के पैरों से उस वक्त जमीन खिसक गयी, जब उन्हें पता चला कि आलोक ने कागजातों में हेराफेरी कर न केवल उन्हें एवं उनके भाई को उन्हीं की कंपनी से निकाल बाहर किया है, बल्कि उनकी कंपनी का एक करोड़ पांच लाख रुपया धोखाधड़ी से अपने अकाउंट में ट्रांसफर करवा लिया है. जब वह इस बाबत पूछताछ के लिए आलोक के घर गये तो पता चला कि वह अपनी पत्नी एवं बेटे के साथ फरार हो गया है. नारायण साईं पर अगाध विश्वास के कारण उन्होंने उस समय पुलिस में मामले की रिपोर्ट दर्ज नहीं करवायी, बल्कि नारायण साईं के साथ संपर्क किया.

जनवरी में जब नारायण साईं कोलकाता आया तो उन्होंने सारी बात उसे बतायी. तब नारायण साईं ने श्री सचदेव को बताया कि आलोक ने उन्हें फोन किया था, उसने उनकी रकम का 50-60 प्रतिशत वापस करने का आश्वासन दिया है. बाकी पैसे वह धीरे-धीरे लौटा देगा. पर वह आश्वासन अब तक पूरा नहीं हुआ. इन लोगों ने जब-जब बार-बार नारायण साईं को फोन किया, तब जा कर फरवरी में उसने श्री सचदेव को मामले की रिपोर्ट पुलिस में दर्ज करवाने की इजाजत तो दी, पर साथ ही यह धमकी भी दी कि अगर उनका नाम लिया तो खैर नहीं. 31 मार्च 2009 को उन लोगों ने बऊबाजार थाने में इस धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज करवायी, पर इस मामले में नारायण साईं का नाम दर्ज नहीं करवाया. वे लोग बार-बार नारायण साईं से गिड़गिड़ाते रहे, पर कुछ भी नहीं हुआ. इस दौरान उन्हें पता चला कि आलोक ने केवल उन्हें ही नहीं, बल्कि कई और लोगों को एवं कई बैंकों को भी चूना लगाया है.

26 मई 2010 को नारायण साईं गरिया स्थित अपने आश्रम आये थे. उस दिन श्री सचदेव का बेटा तेजस्वी अपनी मां के साथ उनसे मिलने गया और उनसे मदद की गुहार लगायी. पर नारायण साईं ने मदद करने की बजाय वहां मौजूद अपने गुर्गो को तेजस्वी को जान से मारने की हिदायत दे दी. जिस पर उन लोगों ने उसे काफी मारा पीटा. उसकी मां किसी तरह उसे बचा कर वहां ले भागी और पियरलेस अस्पताल ले गयी. तेजस्वी के सारे कपड़े खून में सन गये थे. रात में वे लोग किसी तरह सोनारपुर थाने पहुंचे और वहां नारायण साईं एवं उसके साथियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करायी. पर इतना अरसा गुजरने के बावजूद आज तक पुलिस ने नारायण साईं या उसके किसी गुर्गे को गिरफ्तार नहीं किया है. पुलिस के कागजातों में उसे फरार बताया गया है. श्री सचदेव का कहना है कि उन्हें पता चला है कि आलोक आसाराम का मुंहबोला बेटा है और आसाराम व नारायण साईं इसी प्रकार लोगों को उसके द्वारा धोखाधड़ी का शिकार बनाते हैं.

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