पूर्व वित्त मंत्री असीम दास ने दोहरायी सीबीआइ जांच की मांग
कोलकाता : चिटफंड कंपनी सारधा समूह के कथित घोटाले के भुक्तभोगी निवेशकों के मुआवजे की प्रक्रिया पर एक बार फिर वामपंथियों ने सवाल उठाये हैं. राज्य के पूर्व वित्त मंत्री व माकपा के आला नेता ने रविवार आरोप लगाया कि राज्य सरकार द्वारा मुआवजे की राशि जुटाने की प्रक्रिया गलत व असंवैधानिक है.
उन्होंने कहा कि तृणमूल सरकार मुआवजे को लेकर हाइकोर्ट के दिये दिशा–निर्देशों का भी पालन नहीं कर रही है.
सारधा घोटाले के शिकार बने लोगों को मुआवजा देने के लिए पहले चिटफंड कंपनी के मालिकाना पक्ष व आरोपियों की संपत्ति जब्त करनी चाहिए, लेकिन सरकार ऐसा नहीं कर रही है. माकपा की ओर से उन्होंने एक बार फिर मामले की जांच सीबीआइ से कराये जाने की मांग की और कहा कि वाममोरचा की ओर से यह मांग लगातार की जा रही है लेकिन राज्य सरकार इस मामले की सटिक जांच से परहेज कर रही है.
पूर्ववर्ती वाममोरचा सरकार के सत्ता में रहने के दौरान राज्य में ऋण का दबाव बढ़ने के आरोप मुख्यमंत्री व तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी द्वारा लगातार लगाये जाते रहे हैं.
इन आरोपों का जवाब देते हुए पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार की राज्य विरोधी नीतियों की वजह से ही ऋण का दबाव बढ़ा है.
जब तृणमूल कांग्रेस संप्रग सरकार में सहयोगी दल थी तब कई जनविरोधी नीतियों का विरोध नहीं किया गया.
वर्ष 2012-13 में राज्य को केंद्र सरकार को सालाना करीब 25 हजार करोड़ रुपये ऋण के ब्याज के तौर पर देने पड़ते थे. वर्तमान में यह राशि करीब 28 हजार करोड़ रुपये है. राज्य के कुल ऋण की राशि 1,92,000 करोड़ रुपये है.
केंद्र का दामन छूटने के बाद तृणमूल सरकार अपनी गलती को छिपाने के लिए पूर्ववर्ती वाममोरचा सरकार पर आरोप लगा रही है, जिसका कोई तुक नहीं है.
