कोलकाता /नयी दिल्ली: मुआवजे में करीब नौ गुना बढ़ोतरी करते हुए शीर्ष उपभोक्ता आयोग ने पश्चिम बंगाल के एक डॉक्टर को वर्ष 1995 में एक बच्चे के हाथ की हड्डी टूटने के इलाज के दौरान लापरवाही बरतने के लिए उसके पिता को पांच लाख रुपये देने के लिए कहा है.
राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निबटारा आयोग ने पश्चिम बंगाल राज्य उपभोक्ता आयोग की ओर से घोषित 55 हजार रुपये के मुआवजे को बढ़ाते हुए कहा कि डॉक्टर देबापी राय द्वारा चिकित्सकीय इलाज के दौरान की गयी लापरवाही की तुलना में यह मुआवजा ‘बिल्कुल भी पर्याप्त नहीं है’.
गलत इलाज से कर्ज में डूब गया परिवार
न्यायमूर्ति अशोक भान ने कहा कि न्याय के हित में हमें मुआवजे की राशि पांच लाख रुपये करना ठीक लगता है. यह आदेश लड़के के पिता अनूप कुमार की याचिका पर आया, जिन्होंने राज्य उपभोक्ता आयोग द्वारा घोषित मुआवजे की राशि को बढ़ाने की मांग की थी. उन्होंने अपनी याचिका में कहा था कि डॉक्टर राय की लापरवाही के कारण एक बच्चे का भविष्य बर्बाद हो गया और उसके परिवार को बच्चे के इलाज के लिए काफी कर्ज लेना पड़ा.
