झाड़ग्राम : पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपने काफिले के साथ माओवादियों के गढ़ रहे जंगलमहल के एक दूरदराज के गांव में जब बिना किसी घोषणा के पहुंची तो गांववाले अचकचा से गए.
पश्चिम मिदनापुर में बिनपुर ब्लाक के गोपीनाथपुर गांव में नन्हे बच्चे आंखें फाड़े ममता और उनके काफिले को देख रहे थे. इसपर उन्होंने उनसे पूछा कि क्या उन्हें अपने स्कूल में मध्याह्न भोजन मिला. ममता ने सवाल किए, ‘‘क्या तुम्हें मध्याह्न भोजन मिला? क्या खाना ठीक से बना था?’’ जब बच्चों ने डरते-डरते उन्हें बताया कि उन्हें मध्याह्न भोजन में भात और मछली मिली है, तो मुख्यमंत्री ने सवाल किया, ‘‘क्या तुम्हें अंडे नहीं मिलते हैं?’’बच्चों ने कोई जवाब नहीं दिया. इसपर ममता ने अपने अधिकारियों से कहा कि वह इस मामले को देखें.
मुख्यमंत्री को देख कर गांव की महिलाओं ने उन्हें एक गिलास दूध पेश किया. ममता ने इसे स्वीकार नहीं किया और कहा, ‘‘आपके पास जो हो, आप दे सकती हैं. मुङो मूढ़ी (मुरमुरे) पसंद हैं. मुङो मूढ़ी चाय दें.’’ ममता ने गांववालों से पूछा कि क्या उन्हें इंदिरा आवास योजना का लाभ मिल रहा है तो उन्होंने इसका जवाब ना में दिया. इसपर उन्होंने जिला मजिस्ट्रेट मोहम्मद गुलाम अली अंसारी से कहा कि योजना के तहत गांव की बीपीएल आबादी के लिए आवास के निर्माण का प्रबंध करें. गांव वालों ने बताया कि गांव के सभी 22 मकान मिट्टी के बने हैं.
