UP Politics: उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुरादाबाद मण्डल दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. एक तरफ जहां समाजवादी पार्टी (सपा) इसे अपना मजबूत दुर्ग मानकर अपनी साख बचाने की जद्दोजहद में जुटी है, वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) इस क्षेत्र में अपना परचम लहराने के लिए रणनीति तैयार कर रही है. मण्डल की सात विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जहां बीजेपी लंबे समय से जीत का स्वाद नहीं चख सकी है. इन क्षेत्रों में सपा के मजबूत जनाधार को कमजोर करने के लिए भाजपा व्यापक आंतरिक सर्वे कराने के साथ-साथ जिताऊ उम्मीदवारों और अपने सहयोगी दलों की संभावनाओं पर ध्यान केंद्रित कर रही है.
चुनावी आंकड़ों में क्षेत्रीय पकड़ की खींचतान
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इस हिस्से में समाजवादी पार्टी की राजनीतिक स्थिति काफी मजबूत मानी जाती है. हालांकि वर्ष 2017 के राज्य विधानसभा चुनाव में भाजपा को पूरे प्रदेश में भारी बहुमत प्राप्त हुआ था, फिर भी सपा ने इस मण्डल की 12 सीटों पर अपनी पकड़ बनाए रखी थी. इसके बाद 2022 के चुनावों में सपा ने अपने प्रदर्शन में और सुधार करते हुए मण्डल की 17 सीटों पर विजय दर्ज की, जबकि भाजपा सिमटकर 10 सीटों पर रह गई. चुनावी आंकड़ों का यह संतुलन दोनों ही पार्टियों के लिए इस इलाके को राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण बना देता है.
भाजपा के लिए लंबे समय से अजेय बनी सीटें
मण्डल के अंतर्गत आने वाली सात विधानसभा सीटों पर बीजेपी को दशकों से जीत हासिल नहीं हुई है. किसी क्षेत्र में पार्टी लगभग तीन दशक से पराजित हो रही है, तो किसी सीट पर 33 वर्षों से जीत का खाता नहीं खुला है. हालांकि, रामपुर और कुंदरकी में हुए हालिया उप-चुनावों में जीत दर्ज कर पार्टी ने अपने लंबे सूखे को समाप्त करने का संदेश दिया है. इसके बावजूद मुरादाबाद देहात, अमरोहा, संभल, नगीना और नजीबाबाद जैसी सीटों पर भाजपा को अब भी अपनी पहली सफलता का इंतजार है, जिसके लिए पार्टी नेतृत्व लगातार बैठकों और मंथन में जुटा है.
मुस्लिम बहुल क्षेत्रों के लिए नया राजनीतिक प्रयोग
मुस्लिम बहुल मतदाताओं वाले इन क्षेत्रों में अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए भाजपा नए राजनीतिक कार्ड भी खेल रही है. पार्टी के शीर्ष संगठन में मुस्लिम चेहरों को जिम्मेदारी सौंपना और गठबंधन सहयोगियों की सक्रियता बढ़ाना इसी रणनीति का हिस्सा है. राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिमी यूपी के इस क्षेत्र में पसमांदा और अन्य वर्गों को साधने के साथ-साथ सहयोगियों की जमीनी पकड़ के जरिए सपा के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश की जा रही है.
मुरादाबाद मंडल में भाजपा की जीत का सूखा और सीटों का ऐतिहासिक रिकॉर्ड
मुरादाबाद मंडल की सात प्रमुख सीटों पर भारतीय जनता पार्टी को तीन दशकों से जीत का इंतजार रहा है, जिन्हें पुनः हासिल करने के लिए पार्टी लगातार प्रयास कर रही है. जहां मुरादाबाद देहात और संभल सीट पर पार्टी को अंतिम सफलता 1993 में मिली थी, वहीं अमरोहा में 1996 के बाद से सूखा बना हुआ है. इसी प्रकार नगीना और नजीबाबाद सीटों पर भाजपा ने आखिरी बार 1991 में परचम लहराया था. हालांकि, हाल के घटनाक्रमों में रामपुर और कुंदरकी के उप-चुनावों में जीत दर्ज कर पार्टी ने लंबे अंतराल को तोड़ने का प्रयास किया है, लेकिन अन्य सीटों पर राजनीतिक पकड़ बनाने की कोशिशें जारी हैं.
