UP Panchayat Election 2026: यूपी पंचायत चुनाव 2026 की आहट के साथ ही गाँवों में सियासी चौपालें सजने लगी हैं. इसी चुनावी सरगर्मी के बीच कई महिलाओं के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या पति के निधन के बाद वे ग्राम प्रधान का चुनाव लड़ सकती हैं? इसका सीधा और स्पष्ट जवाब है 'हाँ'. सिर्फ विधवा होने की वजह से किसी महिला को चुनाव लड़ने से बेदखल नहीं किया जा सकता. हालाँकि, इसके लिए उम्मीदवार को राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा तय की गई अन्य सभी योग्यताएं पूरी करनी होंगी.
विधवा होने पर चुनाव लड़ने की मनाही नहीं
पति की मृत्यु के बाद महिला की वैवाहिक स्थिति बदलने से वह अपने आप चुनाव लड़ने के अधिकार से वंचित नहीं होती. यानी विधवा महिला भी ग्राम प्रधान पद के लिए नामांकन कर सकती है. कानून में महिलाओं को अनारक्षित सीट से चुनाव लड़ने से रोकने वाला कोई प्रावधान नहीं है. वहीं सीट अगर किसी आरक्षित वर्ग के लिए तय है, तो उम्मीदवार को उस आरक्षण से जुड़ी पात्रता पूरी करनी होगी.
महिला सीट का इंतजार करना जरूरी नहीं
एक और जरूरी बात यह है कि विधवा महिला को चुनाव लड़ने के लिए सीट का महिला के लिए आरक्षित होना जरूरी नहीं है. अगर ग्राम प्रधान की सीट अनारक्षित है और महिला बाकी जरूरी शर्तें पूरी करती है, तो वह उस सीट से भी चुनाव लड़ सकती है. राज्य निर्वाचन आयोग की व्यवस्था में ग्राम प्रधान पदों के लिए अलग-अलग आरक्षण श्रेणियां तय होती हैं.
उम्र और मतदाता सूची भी जरूरी
विधवा होना बाधा नहीं है, लेकिन उम्मीदवार को पंचायत चुनाव की दूसरी शर्तें पूरी करनी होंगी. ग्राम प्रधान का चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम उम्र 21 वर्ष है. साथ ही मतदाता सूची से जुड़ी पात्रता भी महत्वपूर्ण है. राज्य निर्वाचन आयोग पंचायत निर्वाचक नामावली तैयार करता है और इसके लिए अलग-अलग फॉर्म व प्रक्रिया निर्धारित हैं.
