UP Politics: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सियासी दलों के बीच नेताओं की अदला-बदली का दौर शुरू होता दिख रहा है. इसी बीच असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता और वरिष्ठ नेता आसिम वकार के पार्टी छोड़ने की चर्चा ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है. सूत्रों के मुताबिक, करीब एक दशक तक AIMIM से जुड़े रहने के बाद वह 2 सितंबर को कांग्रेस का दामन थाम सकते हैं.
10 साल बाद AIMIM से दूरी की अटकलें
आसिम वकार AIMIM के प्रमुख मुस्लिम चेहरों में गिने जाते रहे हैं और राष्ट्रीय प्रवक्ता के तौर पर पार्टी का पक्ष मजबूती से रखते रहे हैं. बताया जा रहा है कि पार्टी के कुछ अंदरूनी फैसलों को लेकर उनकी नाराजगी बढ़ी थी. हालांकि, आसिम वकार ने अपने संभावित फैसले और नाराजगी की वजहों पर सार्वजनिक रूप से विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी है.
सपा में भी रहा है लंबा राजनीतिक सफर
AIMIM से पहले आसिम वकार का राजनीतिक सफर समाजवादी पार्टी से भी जुड़ा रहा है. वह करीब दो दशक तक सपा में सक्रिय रहे थे. ऐसे में उनके AIMIM से अलग होने की अटकलों के बीच उनके सपा में वापसी की भी चर्चा थी. लेकिन अब राजनीतिक गलियारों में कांग्रेस में उनके शामिल होने की संभावना को लेकर चर्चाएं ज्यादा तेज हैं.
इमरान प्रतापगढ़ी की भूमिका की चर्चा
सूत्रों के अनुसार, आसिम वकार को कांग्रेस से जोड़ने में अल्पसंख्यक कांग्रेस के अध्यक्ष इमरान प्रतापगढ़ी की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है. कांग्रेस उत्तर प्रदेश में अपने संगठन और खासतौर पर अल्पसंख्यक वर्ग के बीच राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है. ऐसे में AIMIM के एक प्रमुख चेहरे का कांग्रेस की ओर रुख करना चुनावी राजनीति में नई चर्चा का विषय बन गया है.
2022 में 95 सीटों पर लड़ी थी AIMIM
पिछले विधानसभा चुनाव में AIMIM ने उत्तर प्रदेश की 95 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन पार्टी कोई सीट जीतने में सफल नहीं हो सकी थी. इसके बावजूद ओवैसी लगातार यूपी में संगठन विस्तार और मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश करते रहे हैं. ऐसे समय में पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के संभावित रूप से अलग होने की खबर AIMIM की रणनीति के लिए चुनौती मानी जा रही है.
2027 के समीकरणों पर नजर
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस, सपा, बीजेपी, बसपा और AIMIM सभी अपनी-अपनी राजनीतिक रणनीति मजबूत करने में जुटी हैं. यदि आसिम वकार आधिकारिक रूप से कांग्रेस में शामिल होते हैं, तो इसे केवल एक नेता के दल बदलने से अधिक, बल्कि यूपी के अल्पसंख्यक वोटों से जुड़े बदलते राजनीतिक समीकरणों के रूप में भी देखा जाएगा. अब सभी की नजर 2 सितंबर के घटनाक्रम और कांग्रेस की संभावित घोषणा पर टिकी है.
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