कांच चबाती थी, सुई निगल जाती थी, इस बीमारी में क्यों खाने लगता है इंसान गैर-खाद्य चीजें? प्रयागराज में चौंकाने वाला मामला

Prayagraj News: मानसिक तनाव के कारण 24 वर्षीय विजमा कुमारी ने सुई, पिन और कांच के टुकड़े निगल लिए, जिससे उनकी आंतों में गंभीर संक्रमण फैल गया. डॉक्टरों ने जटिल सर्जरी कर उनकी जान बचाई.

Prayagraj News: प्रयागराज में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां खागा की रहने वाली 24 वर्षीय विजमा कुमारी ने मानसिक तनाव और परेशानी के बीच सुई, नुकीले हेयर पिन और कांच की चूड़ियों के टुकड़े निगल लिए. एक्स-रे और सीटी स्कैन में पेट के अंदर ये नुकीली चीजें दिखाई दीं. जांच के बाद शुक्रवार को नारायण स्वरूप हॉस्पिटल में उनकी सर्जरी की गई. करीब तीन घंटे चले ऑपरेशन में डॉक्टरों ने सुइयों और अन्य नुकीली चीजों को बाहर निकाला. सर्जरी के बाद उनकी हालत में सुधार बताया जा रहा है और उन्हें वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है.

मानसिक परेशानी के बीच निगलने लगीं नुकीली चीजें

विजमा पिछले सात महीनों से मानसिक तनाव और परेशानी से जूझ रही थीं. उनके पति बृजेश सूरत में प्राइवेट नौकरी करते हैं और उनका एक साल का बेटा है. परिवार के मुताबिक, मानसिक परेशानी के चलते विजमा सुई, पिन, नुकीली चीजें और कांच के टुकड़े निगलने लगी थीं. इन चीजों की वजह से उनकी आंतों में कई जगह छेद हो गए. दो सुइयां आंत को चीरते हुए दाहिनी किडनी तक पहुंच गई थीं. आंत फटने के कारण पेट में गंभीर संक्रमण फैलने लगा था और उनकी हालत नाजुक हो गई थी.

रोते हुए बताई सुई निगलने की बात, फिर अस्पताल ले गया परिवार

विजमा के जेठ गुमान सिंह ने बताया कि परिवार ने उनका कई जगह इलाज कराया, लेकिन उनकी परेशानी में सुधार नहीं हुआ. एक दिन काम से लौटने के बाद उन्होंने विजमा को रोते हुए देखा. पूछने पर विजमा ने सुई निगलने की बात बताई. इसके बाद परिवार उन्हें तुरंत स्थानीय डॉक्टर के पास लेकर पहुंचा. एक्स-रे में स्थिति गंभीर मिलने के बाद डॉक्टरों ने बड़े अस्पताल में इलाज कराने की सलाह दी. इसके बाद विजमा को प्रयागराज लाकर नारायण स्वरूप हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया.

सी-आर्म मशीन की मदद से ढाई घंटे में निकालीं सुइयां

डॉक्टर राजीव सिंह के मुताबिक, स्थानीय स्तर पर पहले एक्स-रे और इसके बाद सीटी स्कैन कराया गया था. जांच में पेट के अंदर फंसी सुइयों की स्थिति का पता चला. आंतों के भीतर सुइयों को ढूंढना डॉक्टरों के लिए चुनौतीपूर्ण था. ऑपरेशन के दौरान सी-आर्म तकनीक की मदद ली गई. डॉक्टरों की टीम ने करीब ढाई घंटे की सर्जरी के बाद सभी सुइयों को बाहर निकाल लिया. इस दौरान नुकीली चीजों से क्षतिग्रस्त हुई आंतों की भी मरम्मत की गई. सर्जरी के बाद विजमा की हालत में सुधार हुआ और उन्हें वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया.

क्या है पायका डिसऑर्डर?

डॉक्टरों के अनुसार, विजमा को ‘पायका’ नाम का दुर्लभ ईटिंग डिसऑर्डर हो गया था. इसमें व्यक्ति ऐसी चीजें खाने या निगलने लगता है, जो सामान्य तौर पर खाने योग्य नहीं होतीं. मिट्टी, चॉक, कागज, बाल, सुई, पिन और कांच जैसी चीजें भी इसमें शामिल हो सकती हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक, ज्यादा मानसिक तनाव, डिप्रेशन, पारिवारिक परेशानी और OCD जैसी स्थितियां इसके पीछे कारण हो सकती हैं. इसके अलावा शरीर में आयरन, जिंक या अन्य पोषक तत्वों की कमी भी ऐसी आदत को बढ़ावा दे सकती है.

असामान्य खान-पान को नजरअंदाज न करने की सलाह

डॉक्टर राजीव सिंह ने बताया कि यदि किसी व्यक्ति के व्यवहार और खान-पान की आदतों में असामान्य बदलाव दिखाई दे और वह खाने की चीजों के बजाय दूसरी वस्तुएं खाने या निगलने लगे, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए. समय पर डॉक्टर से संपर्क कर जांच, काउंसलिंग और जरूरी इलाज कराया जाए तो समस्या को गंभीर होने से रोका जा सकता है. पायका की स्थिति में नुकीली या दूसरी गैर-खाद्य वस्तुएं शरीर के अंदर जाकर आंतों और अन्य अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती हैं.

Must Read- Teacher’s Day पर सपा का बड़ा दांव, बंद स्कूलों के बाहर होगा शिक्षक सम्मान; 11 सितंबर तक चलेगा अभियान

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By कोमल अग्रवाल

कोमल अग्रवाल पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और वर्तमान में प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. वे डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और विभिन्न विषयों पर समाचार एवं लेख लिखती हैं. इससे पहले उन्होंने प्रिंट और डिजिटल मीडिया में इंटर्नशिप एवं कार्य अनुभव प्राप्त किया है, जहां उन्होंने रिपोर्टिंग, कंटेंट राइटिंग, सोशल मीडिया मैनेजमेंट और वीडियो एडिटिंग जैसे क्षेत्रों में काम किया. उन्होंने पटना विमेंस कॉलेज से जनसंचार एवं पत्रकारिता की पढ़ाई की है. कोमल तथ्यपरक, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित पत्रकारिता में विश्वास रखती हैं तथा सरल, सटीक और प्रभावी समाचार लेखन को प्राथमिकता देती हैं.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >