UP News: बलिया जनपद के थाना बांसडीह क्षेत्र के एक पीड़ित ने पुलिस प्रशासन पर लगातार शिकायतों के बावजूद समय से कार्रवाई नहीं करने और मामले में कथित तौर पर गलत रिपोर्ट लगाने का आरोप लगाया है. पीड़ित का कहना है कि उसकी लड़ाई पुलिस से नहीं, बल्कि पुलिस की कथित लापरवाही के खिलाफ है. उसने आरोप लगाया कि करीब दो वर्ष बाद मुकदमा दर्ज हुआ, लेकिन प्राथमिकी दर्ज होने के दो माह बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई और कथित चोरी अथवा विवादित सामान की बरामदगी भी नहीं हो सकी है.
पीड़ित ने थाना बांसडीह और क्षेत्राधिकारी बांसडीह स्तर से पूर्व में लगायी गयी रिपोर्ट की उच्चाधिकारियों से जांच कराने की मांग की है. उसका आरोप है कि जांच में यदि रिपोर्ट गलत पायी जाती है, तो संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए. पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया कि मामले में विरोध करने पर उसे जेल भेजने की धमकी दी जाती है और विरोधी पक्ष को कथित रूप से संरक्षण दिया जा रहा है.
पारिवारिक विवाद में भी लगाये गंभीर आरोप
पीड़ित ने अपने पारिवारिक विवाद को लेकर भी कई गंभीर आरोप लगाए हैं. उसका दावा है कि परिवार के सदस्यों और पड़ोसी की ओर से उसकी संपत्ति, कमाई और वैवाहिक जीवन को नुकसान पहुंचाया गया. उसने पत्नी पर बिना वैधानिक तलाक के दूसरी शादी करने का आरोप लगाते हुए संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
पीड़ित का कहना है कि उसे भोजन, अनाज और संपत्ति में उसके हिस्से से भी वंचित किया जा रहा है. उसने लगातार मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया है. उसके अनुसार, इसी परेशानी के कारण उसे धरना-प्रदर्शन का सहारा लेना पड़ा और पुलिस कार्रवाई से निराश होकर वह दूसरी बार टावर पर चढ़ने की स्थिति में पहुंच गया.
मुकदमा संख्या 181/26 में कार्रवाई की मांग
पीड़ित ने मुकदमा संख्या 181/26 में आरोपियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है. इसके साथ ही उसने थाना बांसडीह और क्षेत्राधिकारी बांसडीह की ओर से पूर्व में लगायी गयी रिपोर्ट की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग रखी है. उसका कहना है कि यदि जांच में रिपोर्ट गलत पायी जाती है तो संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए. पीड़ित ने कथित नुकसान के लिए मुआवजा देने की भी मांग की है. साथ ही उसने आरोप लगाया कि उसे ऐसी परिस्थितियों में धकेला जा रहा है, जिससे वह आत्महत्या जैसा कदम उठाने के लिए मजबूर हो सकता है. इस संबंध में भी उसने मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की मांग की है.
10 लाख रुपये और जमीन का हिस्सा देने की मांग
पीड़ित की प्रमुख मांगों में 10 लाख रुपये और उसके हिस्से की जमीन देना शामिल है. उसका कहना है कि यदि उसे यह राशि और जीवन-यापन के लिए उसके हिस्से की जमीन उपलब्ध करा दी जाती है, तो वह अपने सभी मुकदमों में नियमानुसार सुलह करने को तैयार है. इसके अलावा उसने अपने जीवन-यापन के लिए भोजन और अनाज की व्यवस्था कराने तथा संपत्ति में उसके वैधानिक हिस्से को दिलाने की मांग की है. उसने पूर्व समझौते के अनुसार शादी का खर्च दिलाने की मांग भी पुलिस-प्रशासन के सामने रखी है.
निष्पक्ष जांच और सुरक्षा की मांग
पीड़ित ने पुलिस प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. साथ ही उसने अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी अपील की है. मामला पुलिस कार्रवाई, संपत्ति विवाद और पारिवारिक विवाद से जुड़ा है. पीड़ित की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. ऐसे में पुलिस और प्रशासन की जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.
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