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UP में शख्स पर एक ही थाने में पुलिस ने कर दिया 49 FIR दर्ज, हाईकोर्ट ने DGP-SSP को किया तलब

कोर्ट ने कहा है कि यह केवल जमानत का मसला नहीं है, बल्कि अनुशासित पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर उठे सवालों के जवाब का भी है. इसलिए दोनों शीर्ष अधिकारी अगली सुनवाई की तारीख 13 दिसंबर को अदालत में हाजिर हो.

By Prabhat Khabar Digital Desk, Prayagraj
Updated Date
इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट
Photo: Twitter

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने फर्जी मुकदमों में याची को फंसाने और परेशान करने के मामले में थाना कटौली, मुजफ्फरनगर की पुलिस के खिलाफ सख्त कदम उठाने के लिए प्रदेश के पुलिस महानिदेशक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मुजफ्फरनगर को 13 दिसंबर को हाजिर होने का निर्देश दिया है. यह आदेश न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह ने गौरव उर्फ गौरा की नारकोटिक्स ड्रग्स एक्ट के तहत दर्ज मामले में दाखिल जमानत अर्जी पर दिया है.

कोर्ट ने कहा है कि यह केवल जमानत का मसला नहीं है, बल्कि अनुशासित पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर उठे सवालों के जवाब का भी है. कोर्ट ने कहा कि हर आदमी के जीवन की कीमत एक समान है. गुजरे दिन लौट कर वापस नहीं आते. मुआवजे से जीवन में लगे दाग नहीं धुल सकते.

कोर्ट ने कहा पिछले 23 सालों में पुलिस ने याची पर 49 आपराधिक केस दर्ज किए. अधिकांश मुकदमों में याची बरी हो गया. कुछ मुकदमों में पुलिस ने गलती से शामिल होना मानकर वापस ले लिया. मानवाधिकार आयोग ने भी पुलिस पर याची के पक्ष में दस हजार रुपए का हर्जाना लगाया. हाईकोर्ट ने कहा कि केस में फंसाने का पुलिस का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. इसलिए दोनों शीर्ष अधिकारी अगली सुनवाई की तारीख 13 दिसंबर को अदालत में हाजिर हो.

कोर्ट के निर्देश पर याची का आपराधिक केस चार्ट पेश किया गया. जिसमें एक ही थाने कटौली में याची पर 49 केस दर्ज होने की बात सामने आई है. याची 45 मामलो में से 11 में बरी हो चुका है. 9 केस पुलिस ने वापस ले लिया. 2 मुकदमे में गलती से याची का नाम शामिल किया गया था. एक केस में एनएसए भी लगा था, जो रद्द हो चुका है. 21 केस में वह जमानत पर हैं. एक में अग्रिम जमानत मिली है.

हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्यशैली पर नाराजगी जाहिर करते हुए सख्त टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा पुलिस सुधरने के बजाय और परेशान करने पर आमादा है. पुलिस का रवैया समझ से परे है. बार बार केस दर्ज कर रही है. कोर्ट ने कहा अनुशासित पुलिस बल से ऐसी उम्मीद नहीं की जा सकती.

कोर्ट ने कहा कि पुलिस समाज में सुरक्षा शांति और सामाजिक सौहार्द के लिए है. आरोपों की टोकरी जीवन में अंधकार ही लाती है. इससे जीवन बर्बाद होता है. जिस पर रोक लगनी चाहिए. मामले में अगली सुनवाई 13 दिसंबर को होगी. न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह ने प्रदेश के डीजीपी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मुजफ्फरनगर को 13 दिसंबर को कोर्ट के सामने हाजिर होने का निर्देश दिया है.

इनपुट : एसके इलाहाबादी

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