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Exclusive: अलीगढ़ की मंडी समिति का सरकारी कैम्पस बना प्राइवेट प्रचार का अड्डा, सरकार हो रहा लाखों का नुकसान

मंडी के दिवारों पर प्राइवेट विज्ञापन आने जाने-वाले किसानों को आकर्षित भी कर रहे हैं और इन विज्ञापनों से इनके संस्थान जमकर कमाई भी कर रहे हैं.

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
अलीगढ़ के मंडी समिति का सरकारी कैम्पस बना प्राइवेट प्रचार का अड्डा
अलीगढ़ के मंडी समिति का सरकारी कैम्पस बना प्राइवेट प्रचार का अड्डा
Prabhat khabar

यूपी के सरकारी कैम्पस में विभाग की बिना अनुमति और बिना संज्ञान के किसी भी गतिविधि पर रोक है. लेकिन अलीगढ़ के धनीपुर मंडी में इन नियमों का पालन नहीं किया जाता है. मंडी समिति कैम्पस में मंडी की दुकान के दीवार पर निजी संस्थानों के प्रोडक्ट्स व सर्विस के बैनर टंगे हैं या पैंट से पक्का निजी प्रचार जा रहा है, यही नहीं मंडी परिसर में मच्छर मारने का लोशन, अंग्रेजी सिखाने वाले इंस्टीट्यूट, ट्रेक्टर निर्माण कम्पनी, प्राइवेट डिग्री काॅलेज, कोचिंग सेंटरों, सीमेंट, पर्दे आदि फर्नीशिंग सामान आदि के कई प्राइवेट विज्ञापनों को मंडी कैम्पस की दीवारों पर जगह दी गई है.

धनीपुर मंडी स्थित मंडी समिति कैंपस में मंडी समिति के सचिव व सभापति का कार्यालय है, साथ ही साथ मंडी परिषद के उपनिदेशक के भी कार्यालय हैं. यहां पर अनाज, सब्जियों का कारोबार होता है. यहां फलों के बिक्री की मंडी भी प्रस्तावित है, यानी यह पूरी तरीके से सरकारी कैंपस है जहां धड़ल्ले से हो रहा है निजी प्रचार.

उठ रहे हैं सवाल

मंडी के दिवारों पर प्राइवेट विज्ञापन आने जाने-वाले किसानों को आकर्षित भी कर रहे हैं और इन विज्ञापनों से इनके संस्थान जमकर कमाई भी कर रहे हैं. यह बड़ा सवाल है कि इन दीवारों पर लगे विज्ञापनों से मंडी समिति को कोई आय हो रही है ? हालांकि मंडी समिति के अधिकारी प्रचार करने वालों पर कार्रवाई की बात कह रहे हैं.

अलीगढ़ समाचार
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प्रभात खबर

निजी प्रचार के लिए उठाता है नगर निगम ठेका

अलीगढ़ शहर में भी प्राइवेट विज्ञापनों को लगवाने के लिए नगर निगम ठेका उठाती है, जिसके ऐवज में नगर निगम को अच्छा राजस्व मिलता है. सरकारी ठेका के द्वारा ही प्राइवेट विज्ञापन लगाए जाने की अनुमति मिलती है. मंडी समिति सभापति व सचिव महोदय, मंडी परिसर में निजी कंपनी, प्रोडक्ट, सर्विस के दीवार पर पैंट इन विज्ञापनों की ओर भी ध्यान दिया जाए और अगर मंडी परिसर में ऐसे विज्ञापनों को डिस्प्ले करने के लिए ठेका आदि का प्रावधान किया जाए, तो मंडी समिति के आय का एक और श्रोत भी बन सकता है.

क्या कहते हैं अधिकारी

मंडी समिति के सभापति प्रदीप वर्मा ने प्रभात खबर को बताया कि आज ही मंडी समिति का निरीक्षण किया जाएगा और अगर निजी प्रचार पाए जाते हैं तो तुरंत हटाए जाएंगे और सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी और वह स्वयं मंडी समिति में निरीक्षण करने जाएंगे.

इधर, मंडी समिति के सचिव वीरेंद्र चंदेल से प्रभात खबर की हुई बातचीत में, उन्होंने बताया कि मामले पर तुरंत एक्शन लिया जाएगा, इससे पहले एक बार इस तरीके के कई प्राइवेट प्रचार कैंपस से हटाए गए थे. परंतु फिर इस तरीके का मामला सामने आया है, तो सभी निजी प्रचार को तुरंत हटवाया जाएगा और अगर कोई इस तरीके से प्राइवेट विज्ञापन चिपकाते, बैनर लटकाते या दीवारों पर पैंट करते पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी.

मंडी समिति के बारे में जानिए

उत्तर प्रदेश कृषि उत्पादन मंडी नियमावली 1965 के अंतर्गत राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद उत्तर प्रदेश के अधीन हर जिले में एक मंडी समिति होती है, जिसमें एक सभापति वह एक सचिव प्रमुख अधिकारी के रूप में कार्य देखते हैं. क्षेत्रीय स्तर पर छोटी-छोटी मंडी हां होती हैं मंडी समिति जनपद में अनाज सब्जियों फलों की लिए आरतियां अपने कैंपस में दुकानदारों के लिए लाइसेंस जारी करते हैं.

ताकि किसान यहां पर अनाज सब्जी फल इत्यादि भेज सकें साथ ही मंडी समिति दुकानों के आवंटन का भी कार्य करती है. धर्म कांटे के द्वारा किसान के अनाज फल सब्जियों की तुलाई का कार्य वी मंडी समिति के अधीन है. मंडी समिति मंडियों के सभी मामलों पर कार्यवाही का वैधानिक अधिकार रखती है. मंडी परिषद मंडियों में निर्माण, रखरखाव व मरम्मत के लिए कार्यदायी संस्था है.

इनपुट : चमन शर्मा

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