राजेंद्र कुमार लखनऊ : बहुजन समाज पार्टी (बसपा) राष्ट्रीय दल की मान्यता खोनेवाली है. इसकी वजह दो राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में अपेक्षित सफलता नहीं मिलना है. अब इस बारे में चुनाव आयोग को औपचारिक निर्णय करना है. पार्टी ने हरियाणा विधानसभा की सभी 90 सीटों व महाराष्ट्र विधानसभा की कुल 288 में 260 […]
By Prabhat Khabar Digital Desk | Updated at :
राजेंद्र कुमार
लखनऊ : बहुजन समाज पार्टी (बसपा) राष्ट्रीय दल की मान्यता खोनेवाली है. इसकी वजह दो राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में अपेक्षित सफलता नहीं मिलना है. अब इस बारे में चुनाव आयोग को औपचारिक निर्णय करना है. पार्टी ने हरियाणा विधानसभा की सभी 90 सीटों व महाराष्ट्र विधानसभा की कुल 288 में 260 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे. उसका एकमात्र प्रत्याशी हरियाणा के पृथला में जीता. यहां टेक चंद शर्मा ने भाजपा के नयनपाल रावत को 1,179 वोटों से हराया.
बसपा हरियाणा में 4.4 प्रतिशत वोट ही हासिल कर पायी. इसका साफ मतलब है कि मायावती के दलित वोट बैंक ने उनसे किनारा कर लिया है. महाराष्ट्र में भी बसपा का प्रदर्शन निराशाजनक रहा. बहनजी ने यहां बड़ी रैलियां कीं, लेकिन पार्टी का खाता भी नहीं खुला. प्रदेश में बसपा क सिर्फ 2.2 फीसदी वोट मिले. चुनाव से पहले बहनजी ने एनसीपी के गंठबंधन प्रस्ताव को खारिज कर दिया था.
..तो राष्ट्रीय पार्टी रहती
लोकसभा चुनाव में सभी सीटें गंवानेवाली बसपा को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा बरकरार रखने के लिए इन चुनावों में कम-से-कम दो सीट जीतना जरूरी था. लोकसभा चुनाव के ठीक बाद चुनाव आयोग ने बसपा प्रमुख मायावती से पूछा था कि राष्ट्रीय दल के रूप में उनकी पार्टी की मान्यता क्यों नहीं रद्द होनी चाहिए? तब पार्टी हरियाणा और महाराष्ट्र में विधानसभा चुनावों का हवाला देकर कुछ वक्त पाने में कामयाब रही थी.