Rourkela News: बरकानी के ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, बोले-जमीन छिन जाने पर हमारे सामने रोजी-रोटी का होगा संकट
Rourkela News: बरकानी के ग्रामीणों ने गुरुवार को जमीन और नौकरी की मांग को लेकर प्रदर्शन किया. हाथों में तख्तियां लेकर प्रदर्शन में शामिल सैकड़ों की संख्या में ग्रामीणों ने जमीन के बदले जमीन और नौकरी की मांग की. चिलचिलाती धूप में ग्रामीणों के साथ एतवा ओराम की बेवा भी प्रदर्शन में शामिल हुई. एतवा की पिछले साल प्रदर्शन के दौरान मौत हो गयी थी.
एतवा ओराम की बेवा ने मुआवजा नहीं मिलने का लगाया आरोप
एतवा की पत्नी ने दावा किया कि उनके लिए जो भी मुआवजे की घोषणा की गयी थी, वह अभी तक उन्हें नहीं मिला है. अब जमीन ले लेने पर हमारे सामने दो जून की रोटी का सवाल खड़ा हो जायेगा. हमारे पास खेती को छोड़कर दूसरा कोई विकल्प नहीं है. एतवा ओराम की मौत के एक साल पूरे होने पर ग्रामीण अपने साथ बैनर लेकर पहुंचे थे. ग्रामीणों का कहना है कि हमसे बातचीत तक नहीं की जा रही है. अगर बात होगी, तभी तो सारी बातें साफ होंगी. हमारी लड़ाई 2006 से चल रही है. देश में राष्ट्रपति आदिवासी समाज से हैं, मुख्यमंत्री भी आदिवासी समाज से हैं, फिर हम आदिवासियों के साथ इस तरह का बर्ताव क्यों हो रहा है.
इधर, एसटीपी के लिए जमीन चिह्नित करने पहुंचे अधिकारियों को करना पड़ा विरोध का सामना
कोयल नगर और झीरपानी के बीच प्रस्तावित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के लिए जमीन चिह्नित करने पहुंचे अधिकारियों को बुधवार को ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा. ग्रामीण 171 एकड़ जमीन विस्थापितों को वापस देने की मांग कर रहे हैं, जिसके चलते एसटीपी के लिए भूमि की पहचान नहीं हो सकी. जानकारी के अनुसार, राउरकेला महानगर निगम की योजना कोयलनगर और झीरपानी के बीच एसटीपी स्थापित करने की है. अतिरिक्त जिलापाल और नगर आयुक्त दाना दस्तगीर के निर्देश पर बुधवार को तहसील और तकनीकी विभाग के कर्मचारी स्थल की पहचान के लिए पहुंचे थे. इस दौरान झीरपानी सरपंच अजीत तिर्की, बिसरा जिला परिषद सदस्य हालु मुंडारी, बिसरा ब्लॉक के पूर्व अध्यक्ष सुशील किंडो समेत इलाके के सैकड़ों लोग वहां जुट गये. ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन ने पहले वादा किया था कि विस्थापित लोगों को 171 एकड़ जमीन पर बसाया जायेगा, लेकिन आज तक वह जमीन नहीं दी गयी. सरपंच और जिला परिषद सदस्यों ने कहा कि हम विकास कार्यों का विरोध नहीं कर रहे हैं. प्रशासन पहले हमें 171 एकड़ जमीन उपलब्ध कराये. विस्थापितों को जमीन देने का वादा किया गया था, उसे पूरा किया जाये. ग्रामीणों का विरोध देखते हुए तहसील कर्मचारी वापस लौट गये. इस बारे में अतिरिक्त तहसीलदार सुदक्षा पटेल ने कहा कि प्रस्तावित एसटीपी परियोजना 171 एकड़ जमीन के दायरे में नहीं आती है. पहले भी ग्रामीणों ने शिकायत की थी. उन्होंने बताया कि ग्रामीणों ने अतिरिक्त जिलापाल से भी इस मामले में शिकायत की है.
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