Rourkela News: राउरकेला स्टील प्लांट (आरएसपी) के गोपबंधु ऑडिटोरियम में अंडरग्रेजुएट इंजीनियरिंग छात्रों के लिए वोकेशनल ट्रेनिंग-2026 की शुरुआत पहले बैच के लिए आयोजित ओरिएंटेशन प्रोग्राम के साथ शुरू हुई. खास बात यह है कि देश भर के अलग-अलग इंजीनियरिंग कॉलेजों के 260 छात्र, स्टील बनाने की बारीकियां सीखने के लिए पहले चरण में इस ट्रेनिंग में शामिल हुए. उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता पीके साहू (सीजीएम, एलएंडडी) ने की. इस मौके पर दुर्योधन साहू (डीजीएम,एलएंडडी) भी मौजूद थे. कार्यक्रम का मकसद प्रतिभागियों को एकीकृत इस्पात संयंत्र की गतिविधियों से परिचित कराना और प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान बरती जाने वाली जरूरी सुरक्षा सावधानियों के बारे में बताना था.
अलग-अलग विभागों में काम करने के तरीका सीख सकेंगे
एक दिन के ओरिएंटेशन प्रोग्राम के दौरान, छात्रों को प्रेजेंटेशन और ऑडियो-विजुअल के जरिए आरएसपी के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य, प्रक्रिया प्रवाह, उत्पादों और सुरक्षा नियमों व दिशानिर्देशों के बारे में जानकारी दी गयी. प्रशिक्षुओं को एक जीवंत अनुभव देने के लिए उन्हें एक वीआर फिल्म के जरिए इंटीग्रेटेड स्टील प्लांट की पूरी उत्पादन शृंखला का डिजिटल टूर कराया गया. इसके बाद, उन्हें अलग-अलग विभागों में भेजा गया, जहां वे काम करने के तरीकों को सीख सकेंगे और अपने तय गाइडों की देखरेख में प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार कर सकेंगे. सत्यवती बेहेरा (एडमिन एसोसिएट, एचआर-एलएंडडी) ने कार्यक्रम का संचालन किया, जबकि विनिता तिर्की (सीनियर मैनेजर, एलएंडडी) ने समन्वय किया और धन्यवाद प्रस्ताव दिया.
इंटीग्रेटेड स्टील प्लांट के कामकाज को करीब से जानने का मिलता है मौका
हर गर्मियों में स्टील प्लांट के कर्मचारियों से जुड़े इंजीनियरिंग की विभिन्न शाखाओं के सैकड़ों छात्र, प्लांट द्वारा दी जा रही वोकेशनल ट्रेनिंग में शामिल होते हैं और स्टील बनाने की बारीकियां सीखते हैं. इस कोर्स में न केवल ओडिशा से, बल्कि पूरे देश से छात्र अपनी इंटर्नशिप के हिस्से के तौर पर शामिल होते हैं. एक विशाल इंटीग्रेटेड स्टील प्लांट की तकनीकी बारीकियों और कामकाज को करीब से जानने से छात्रों का मानसिक क्षितिज विस्तृत होता है और यह कई तरह से उनके दृष्टिकोण को भी आकार देता है. बड़ी संख्या में आवेदकों के आने को देखते हुए, ट्रेनिंग को तीन बैचों में आयोजित करने का कार्यक्रम तय किया गया है. प्रशिक्षण की अवधि पाठ्यक्रम की आवश्यकताओं के आधार पर 30 से 60 दिनों तक अलग-अलग होगी.
